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Gram Sabhas: हिमाचल में रोजगार सेवकों और सिलाई टीचरों ने लिखी ग्राम सभाओं की कार्यवाही

Mon, 04 Jul 2022 09:33 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

प्रदेश भर में पंचायत सचिव की हड़ताल के बाद सरकार ने यह वैकल्पिक व्यवस्था की है। हिमाचल प्रदेश में जिला परिषद कैडर के कर्मचारी और पंचायत सचिव अपनी मांग को लेकर बीते एक सप्ताह से हड़ताल पर हैं।
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पंचायत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल में ग्राम सभाओं की कार्यवाही पहली बार ग्राम रोजगार सेवकों और सिलाई टीचरों को नोट करनी पड़ी। प्रदेश भर में पंचायत सचिव की हड़ताल के बाद सरकार ने यह वैकल्पिक व्यवस्था की है। हिमाचल प्रदेश में जिला परिषद कैडर के कर्मचारी और पंचायत सचिव अपनी मांग को लेकर बीते एक सप्ताह से हड़ताल पर हैं। प्रदेश के  कई जिलों में सोमवार को ग्राम सभाओं के चलते पंचायती राज विभाग ने कार्यवाही उतारने का जिम्मा ग्राम रोजगार सेवकों और सिलाई अध्यापिकाओं का सौंपा। प्रदेश में जुलाई अंत तक उपायुक्तों को सूबे की सभी पंचायतों में ग्राम सभाएं करवानी हैं। इस दौरान पंचायतों के विकासात्मक कार्यों सहित अन्य अहम फैसले भी लेने हैं।

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ग्राम सभा की कार्यवाही लिखने की जिम्मेदारी पंचायत सचिवों के पास रहती है लेकिन उनके हड़ताल में जाने के कारण व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा है। यही नहीं, हड़ताल के चलते पंचायतों में किसी तरह के विकास कार्य और प्रमाणपत्र बनाने सहित अन्य दस्तावेज बनाने का काम ठप है। जिला परिषद कैडर के कर्मचारी और पंचायत सचिव सरकारी कर्मचारी घोषित करने की मांग को लेकर अनिश्चित कालीन हड़ताल पर हैं। पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त निदेशक केवल शर्मा ने कहा कि पंचायत सचिवों के हड़ताल पर जाने से ग्राम सभाओं के लिए यह अस्थायी व्यवस्था की गई है।
 

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पंचायत पशु चिकित्सा सहायकों ने पशु निदेशालय का किया घेराव 

हिमाचल प्रदेश पंचायत पशु चिकित्सा सहायकों ने सोमवार सुबह 10:00 बजे अपनी मांगों को लेकर  पशु निदेशालय का घेराव कर जमकर नारेबाजी की। पंचायत पशु चिकित्सा सहायक दो साल का अनुबंध पूरा होने के बाद सरकार से उन्हें रेगुलर करने की मांग कर रहे हैं। प्रदेश पंचायत पशु चिकित्सा सहायक संघ ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगों को नहीं माना गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। संघ के नेताओं ने अपनी मांगों के लेकर पशुपालन विभाग के निदेशक प्रदीप शर्मा को ज्ञापन भी दिया। 

संघ के महासचिव छवि राम वर्मा ने कहा कि सरकार ने पहले भी हमें अनुबंध पर रखा था और अब दोबारा दो साल के अनुबंध में करने की बात कह रही है। इससे पंचायत पशु चिकित्सा सहायकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। सरकार ने दो बैच रेगुलर कर दिए हैं और तीसरे बैच के 350 कर्मचारियों के साथ अन्याय किया जा रहा है। उनका कहना है कि निदेशालय का घेराव मजबूरी में करना पड़ा है। उनका कहना है कि दो बैच के पंचायत पशु चिकित्सा सहायकों को पुरानी नीति के तहत रेगुलर किया जा चुका है।

इसी नीति के तहत उनको भी रेगुलर किया जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो ठोस नीति बनाकर स्थायी किया जाए। वर्मा ने कहा कि प्रदेश के अन्य विभागों में जिस तरह अनुबंध कर्मचारियों को 17,300 रुपये मानदेय दिया जाता है, उसी तरह से उनको भी बराबर मानदेय दें। वर्तमान में पंचायत पशु चिकित्सा सहायकों को 12,910 रुपए मानदेय दिया जाता है। उधर, निदेशक पशुपालन प्रदीप शर्मा ने कहा कि संघ के नेता उनसे मिले हैं। उनसे कहा गया है कि सरकार चरणबद्ध तरीके से पंचायत पशु चिकित्सा सहायकों को रेगुलर कर रही है। उनकी बारी आते ही उनको भी राहत दी जाएगी। 
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