जयराम ठाकुर के मुख्यमंत्री बनने से ग्राम रोजगार सेवकों में नियमितीकरण की आस जग गई है। क्योंकि जयराम ठाकुर के पंचायती राज मंत्री रहते ही प्रदेश में ग्राम रोजगार सेवकों की नियुक्तियां हुई थीं। लेकिन, इसके बाद इनको लेकर कोई ठोस योजना नहीं बन पाई।
ग्राम रोजगार सेवक संघ हिमाचल प्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष शिव राज ठाकुर, महासचिव अनिल सिपहिया, सह सचिव अनिल कुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजय कुमार, उपाध्यक्ष सत्यानंद, मुख्य सलाहकार यशवंत ठाकुर और समस्त जिलों के अध्यक्षों ने कहा कि प्रदेश में 1081 ग्राम रोजगार सेवकों की नियुक्तियां तब हुईं थी, जब पिछली भाजपा सरकार में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग में मंत्री थे।
इन्हें इस पद पर अपनी सेवाएं देते हुए नौ से दस साल हो गए हैं। अपनी सेवाओं के बलबूते ग्राम रोजगार सेवकों ने हिमाचल सरकार को कई अवार्ड दिलाए। पिछली सरकार ने मनरेगा में कार्यरत सभी प्रकार के कर्मियों को रेगुलर वेतनमान देना स्वीकृत किया है।
लेकिन, ग्राम रोजगार सेवकों को इससे वंचित रखा गया और मात्र 252 रुपये दैनिक देना निश्चित किया। महंगाई के इस दौर में मात्र 252 रुपये में अपना गुजारा करना बहुत मुश्किल हो गया है।
समस्त ग्राम रोजगार सेवकों को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के मुख्यमंत्री बनने से बहुत आशाएं है। क्योंकि वे स्वयं ग्राम रोजगार सेवकों की स्थिति से अवगत हैं। संघ ने मांग की कि आगामी कैबिनेट बैठक में ग्राम रोजगार सेवकों के लिए रेगुलर वेतनमान देने के लिए नीति बनाई जाए।