हालांकि, पूर्व कांग्रेस सरकार ने सत्ता बदलने से 6 महीने पहले पॉलिसी बनाने का फैसला लिया था। इसमें नियम इतने जटिल कर दिए कि 14 सालों से सेवाएं दे रहे सैकड़ों पोस्ट ग्रेजुएट कंप्यूटर शिक्षक (पीजीडीसीए) आवेदन नहीं कर पाए। विधानसभा में भी इन शिक्षकों के लिए पॉलिसी बनाने का मामला गूंजता रहा है।
सरकार मान रही है कि कंप्यूटर शिक्षकों का शोषण होता रहा है। ये शिक्षक स्कूलों में नियमित सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इनके लिए पूर्व में रहीं सरकारों ने कुछ नहीं किया।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने तत्तापानी तीर्थ को खत्म करने के लिए कांग्रेस को जिम्मेवार ठहराया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार चाहती तो वह पानी के चश्मों को जलमग्न होने से बचा सकती थी, मगर इस बारे में गंभीरता नहीं बरती गई। सतलुज पर बने कोल डैम के जलाशय में सदियों पुराने पौराणिक महत्व के ये चश्मे डूबने दिए गए।
सीएम ने यह जानकारी शिमला में दी। जयराम ठाकुर ने कहा कि अगर कांग्रेस सरकार चाहती तो तत्तापानी स्थित इन चश्मों को जलमग्न होने से बचाया जा सकता था। तत्तापानी के इस तीर्थ को पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जा सकता था।
कांग्रेस सरकार चुपचाप सब देखती रही। कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में गंभीर रूप से प्रयासरत है। इस तीर्थ को दोबारा से दुरुस्त किया जाएगा। सरकार विचार कर रही है कि ऐसा क्या किया जा सकता है कि जलमग्न गर्म पानी के चश्मों की महत्ता को पूर्ववत बरकरार रखा जाएगा।
लगभग 1134 करोड़ की सेब और अन्य फलों के लिए कार्यान्वित की जा रही बागवानी विकास परियोजना पर ऊपरी और निचले हिमाचल की राजनीति नहीं होने दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बागवानी विकास परियोजना समेत तमाम प्रोजेक्टों के लिए आ रहे पैसों को ठीक से खर्च किया जाएगा, जिससे प्रदेश को लाभ हो।
इस परियोजना के विवादित होने की बात पर सीएम बोले - केंद्रीय स्कीमों के लिए मिले पैसों को समय पर खर्च किया जाएगा। उन्होंने बागवानी विकास परियोजना के लिए पैसा आने के दो साल बाद भी महज 30 से 35 करोड़ ही खर्च पाने के लिए भी कांग्रेस को जिम्मेवार ठहराया। कहा कि यह ढील कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही रही है। अब सारी चीजें ठीकठाक कर दी जाएंगी।