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प्राइवेट स्कूलों ने अगर नहीं माने ये आदेश तो रद्द होगी मान्यता

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निजी स्कूलों में हर कक्षा में 25 प्रतिशत सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित कर दी गई हैं। राज्य सरकार ने गाइडलाइन की अधिसूचना जारी कर दी है। अगले शैक्षणिक सत्र से निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के प्रवेश को सुनिश्चित किया जाएगा। मई में कैबिनेट की बैठक में आरटीई के तहत गाइडलाइन अपनाने को सरकार ने मंजूरी दी है।
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यह व्यवस्था सरकार से किसी भी प्रकार की मदद नहीं लेने वाले निजी स्कूलों पर लागू होगी। ड्राफ्ट गाइडलाइन की अधिसूचना जारी होने के बाद अब हजारों निजी स्कूलों के लिए कुल दाखिल बच्चों में से समाज के कमजोर वर्गों के 25 फीसदी दाखिला देना जरूरी हो गया है। दाखिला न देने वाले स्कूलों की मान्यता को रद्द कर दिया जाएगा।

बीपीएल, एससी, एसटी परिवारों को मिलेगी प्राथमिकता

यह दाखिला बीपीएल परिवारों से संबंधित या विशेष बच्चों को देना होगा। एससी, एसटी परिवारों के बच्चों को भी प्राथमिकता देनी होगी। आरटीई के तहत ऐसा करने की व्यवस्था लागू करने के निर्देश पहले से ही हैं, मगर अब इसे सरकार सख्ती से लागू करेगी।

मुफ्त मिलेगा प्रोस्पेक्टस- निशुल्क सीट के लिए आवेदन करने वाले अभिभावकों से निजी स्कूल किसी भी तरह का पंजीकरण शुल्क और प्रोस्पेक्टस शुल्क नहीं ले सकेंगे। स्कूलों को प्रवेश फार्म निशुल्क उपलब्ध करवाना होगा।

तो ड्रॉ से मिलेगी सीट- कोटे की सीटों के लिए आवेदन करने वाले बच्चों की संख्या यदि तय सीटों से अधिक बढ़ जाती है तो सीटों का बंटवारा ड्रॉ से होगा। अभिभावकों, एसएमसी और शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि की मौजूदगी में ड्रॉ होगा। अगर सीटें कम पड़ जाती हैं तो अन्य श्रेणियों के बच्चों को मौका दिया जाएगा।
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सरकारी स्कूल में 25 बच्चे होना जरूरी

निजी स्कूलों में तभी 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को सीटें उपलब्ध करवाई जाएंगी अगर साथ लगते सरकारी स्कूल में बच्चों की संख्या 25 से अधिक होगी। जो निजी स्कूल सरकार या स्थानीय प्रशासन की ग्रांट के सहयोग के बिना चल रहे हैं, ऐसे स्कूलों को हर छात्र को मुफ्त में पढ़ाने की फीस राज्य सरकार लौटाएगी। प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक अपने-अपने जिलों में इस राशि का भुगतान निजी स्कूलों को करेंगे।

मार्च 2013 में भी जारी हुई थी अधिसूचना- हिमाचल सरकार ने 2013-14 के शैक्षणिक सत्र से सूबे के निजी स्कूलों में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले बच्चों के लिए 25 फीसदी आरक्षण लागू करने की डेडलाइन तैयार की थी। राज्य सरकार ने 16 मार्च 2013 को अधिसूचना भी जारी की थी।

इसके बाद प्रारंभिक शिक्षा विभाग की ओर से हिमाचल सरकार को अगस्त 2013 में 14 पन्नों की गाइडलाइन सौंपी गई, लेकिन इस पर काम नहीं हुआ। गाइडलाइन को सरकार से मंजूरी मिलने के बाद ही हिमाचल में 25 फीसदी आरक्षण शुरू होना था।
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