फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डीएलएड का विरोध, राजकीय अध्यापक संघ ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र

Tue, 26 Sep 2017 08:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन
राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष और अखिल भारतीय माध्यमिक शिक्षक महासंघ के उपाध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडे़कर को पत्र लिखकर डीएलएड का विरोध जताया है। केंद्रीय मंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने मांग की कि पहले से लगे अध्यापकों को या तो छूट दी जाए या फिर प्रशिक्षण सरकार की ओर से स्वयं करवाएं जाएं।
विज्ञापन


मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से 3 अगस्त को निदेशक प्रारंभिक शिक्षा हिमाचल को जारी पत्र का संघ ने विरोध किया है। इसमें कक्षा पहली से आठवीं तक सरकारी सेवारत अध्यापक जो 2001 से 2017 कार्यरत अध्यापकों को एनआईओएस नोएडा से पंजीकृत करवाकर 2 साल का डिप्लोमा एजूकेशन के प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण करवाना पड़ेगा और 31 मार्च 2019 से पहले इस प्रशिक्षण को पूरा करना पड़ेगा। 

चौहान का कहना है कि प्रदेश में कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने वाले अध्यापक आरटीई एक्ट 2010 लागू होने से पहले ही प्रशिक्षित थे। इनमें से कोई भी अध्यापक 2010 से पूर्व बिना प्रशिक्षण नियुक्त नहीं हुआ है। 
विज्ञापन


आरटीई एक्ट 2010 की धारा 23 की उपधारा 2 तथा एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की गाइडलाइन के अनुसार 2010 से पूर्व में नियुक्त अध्यापकों के लिए इस प्रकार का कोई भी नियम का उल्लेख नहीं है कि पहले से कार्यरत अध्यापकों को अंक सुधार और प्रशिक्षण लेना पड़ेगा। 

आरटीई एक्ट में यह तो व्यवस्था की गई थी की 2010 के बाद यदि किसी राज्य के पास प्रशिक्षित अध्यापकों की कमी है तो 5 साल तक अध्यापकों की नियुक्ति में राज्य सरकार केंद्र सरकार से 5 वर्ष के लिए छूट मांग सकती थी। 

प्रदेश शिक्षा विभाग के अधिकारिओं पर भी चौहान ने तुगलकी फरमान जारी करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इस प्रशिक्षण से सरकारी विद्यालय खाली हो जाएंगे। यदि इस फरमान को वापस नहीं लिया गया तो संघ विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल देगा। 

कहा कि विभाग ने कुछ भी साफ नहीं किया है कि डीएम और पीईटी अध्यापकों को भी क्या डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन करना है या 12वीं में 50 प्रतिशत अंक अर्जित करने हैं। उसी तरह एलटी और ओटी को बीएड करना है या डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन करना है। 

17 साल बाद लगने लगे अप्रशिक्षित
शिक्षा विभाग में सितंबर 2001 से 2017 के बीच नियुक्त सभी सीएंडवी अध्यापकों को डीएलएड और बीएड अनिवार्य करने का सीएंडवी अध्यापक संघ ने विरोध किया है। संघ ने प्रशिक्षण प्रक्रिया का बहिष्कार करने का फैसला लिया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष चमन लाल शर्मा का कहना है कि सीएंडवी अध्यापकों की नियुक्ति आरएंडपी नियमों के अनुसार हुई है। इसमें डीएलएड और बीएड करने का कोई प्रावधान नहीं था। अब 17 वर्ष बाद विभाग को सीएंडवी अध्यापक अप्रशिक्षित नजर आने लगे हैं।
Trending Videos
विज्ञापन

मांगें न मानीं तो चुनाव में सरकार का विरोध करेंगे गैर शिक्षक कर्मी

शिक्षा विभाग के गैर शिक्षक कर्मचारियों ने चेताया है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कोई फैसला न लिया गया तो वे विधानसभा चुनाव में खुलकर सरकार का विरोध करेंगे। हिमाचल प्रदेश गैर शिक्षक कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार से बार-बार कहने के बाद भी उनकी मांगों को नहीं माना जा रहा। सरकार पर अफसरशाही पूरी तरह से हावी है, जो पूरी तरह निरंकुश है।


महासंघ के अध्यक्ष त्रिलोक ठाकुर ने कहा कि सीएम वीरभद्र सिंह ने विभाग के वरिष्ठ सहायकों को 520 पदों को अधीक्षक ग्रेड-2 में परिवर्तित करने को कहा था। लेकिन अब तक कुछ नहीं किया गया। नए स्कूल खोल दिए, लेकिन स्टाफ  नहीं दिया। कॉलेजों को तो स्टाफ  दिया, लेकिन निदेशालय स्तर पर डील करने वाला स्टाफ नहीं दिया।

सरकार की इस मनमानी और अदूरदर्शिता की वजह से एक कर्मचारी पर कार्य का बहुत बोझ पड़ गया है। विभाग में क्लर्क से लेकर अधीक्षक तक के करीब तीन हजार पद खाली पड़े हैं। इन पदों को भरने को लेकर सरकार ने गंभीर प्रयास नहीं किया।
 
इसके अलावा सरकार ने कर्मचारियों की 4-9-14 की मांग को भी अभी तक पूरा नहीं किया है, जिससे कर्मचारियों में निराशा है। कहा कि राज्य के 800 स्कूलों में गैर शिक्षक स्टाफ  ही नहीं है। बार- बार मांग करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही। ऐसे में उनके पास अब मुखालफत के सिवा और कोई चारा नहीं है। जो सरकार उनकी सुनवाई करेगी, वे उनके साथ रहेंगे। उन्होंने सीएम से मांग की कि 27 सितंबर को होने वाली कैबिनेट में उनकी मांगों पर विचार हो और 4-9-14 की मांग को माना जाए। 

कर्मचारी नेताओं के खातों की जांच हो
ठाकुर ने आरोप लगाया कि राज्य में तबादला उद्योग चल रहा है। कुछ स्वयंभू कर्मचारी नेताओं ने इसका उद्योग चला रखा है। ऐसे कर्मचारियों के बैंक खातों व आय संपत्तियों की जांच कराई जानी चाहिए। कहा कि ऐसे पदाधिकारियों की आय की जांच की जाए और अनियमितता मिलने पर सख्त कार्रवाई भी की जाए। आरोप लगाया कि इस तबादला उद्योग में कुछ कर्मचारियों के साथ-साथ कुछ अफसर भी मिले हो सकते हैं। यह जांच का विषय है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें