उच्च शिक्षा निदेशक अमरदेव और प्रारंभिक शिक्षा निदेशक मनमोहन शर्मा ने बताया है कि जिलों से ब्योरा लेकर रिपोर्ट बनाई जा रही है। इसी हफ्ते विस्तृत रिपोर्ट बना कर सचिवालय भेजी जाएगी। प्रदेश में जिला मुख्यालयों और पंजाब, हरियाणा से सटे क्षेत्रों में ऐसे शिक्षकों की संख्या अधिक है।
गठजोड़ के चलते इन इलाकों में ये शिक्षक एक अवधि के बाद आपस में ही तबादले करवा लेते हैं। फिर तीन साल बाद दोबारा से ये शिक्षक पुराने स्कूलों में आ जाते हैं। ये सिलसिला बीते कई सालों से जारी है। इसे तोड़ने में जयराम सरकार ने पहल की है।
ऐसे में प्रदेश के हजारों शिक्षकों को कुछ शिक्षकों के लिए नाराज करने का सरकार जोखिम नहीं उठाना चाहती है। इसके चलते ही शिक्षा विभाग ने शिमला शहर, शिमला ग्रामीण और कसुम्पटी में कई सालों से टिके शिक्षकों को अन्य क्षेत्रों में भेजने की तैयारी शुरू कर दी है।
शिक्षा विभाग में तबादलों को आनलाइन पोर्टल के माध्यम से करने का प्रस्ताव बनना शुरू हो गया है। शिक्षा विभाग के अधिकारी इन दिनों हरियाणा के मॉडल को स्टडी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि अगले सप्ताह तक प्रदेश सरकार को ट्रांसफर पोर्टल को प्रस्ताव तैयार कर भेज दिया जाएगा।
प्रदेश में सरकार बेशक पांच साल बाद बदलती हो, लेकिन राजधानी शिमला के इर्द-गिर्द जमे कई शिक्षक आज तक नहीं बदले। शिमला शहर, शिमला ग्रामीण और कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र में 160 शिक्षक ऐसे हैं, जिनके कई सालों से तबादले ही नहीं हुए हैं।
इसके अलावा 200 से ज्यादा ऐसे शिक्षक भी हैं जो हर तीन साल बाद सिर्फ दो ही स्कूलों में ऐडजस्टमेंट करवा कर शिमला के नजदीक टिके हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय में आने वाले इन तीन विधानसभा क्षेत्रों में 56 और प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के 104 शिक्षक ऐसे हैं।
जिनके कई सालों से तबादले ही नहीं हुए। उच्च और प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने लांगर स्टे वाले वाले शिक्षकों की शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज को सूची सौंप दी है। संभवत: इन शिक्षकों के जल्द तबादले कर सरकार पूरे प्रदेश में शिक्षकों को एक स्थान विशेष का मोह छोड़कर पूरे प्रदेश में सेवाएं देने का संदेश देगी।
राजधानी शिमला में ऐसे कई सरकारी स्कूल हैं जहां नेताओं और अफसरों की पत्नियां या रिश्तेदार सेवारत हैं। शिमला से सटे दूसरे विधानसभा क्षेत्रों के स्कूलों में भी अफसरों और नेताओं के करीबी शिक्षकों ने ही कब्जा जमाया हुआ है।
प्रदेश में चाहे सरकार किसी भी पार्टी की रही हो, इन प्रभावशाली शिक्षकों का कोई बाल भी बांका नहीं कर सका है। तीन साल का सेवाकाल समाप्त होते ही अधिकांश प्रभावशाली शिक्षक आसपास के स्कूलों में ही ऐडजस्टमेंट करवाते आए हैं।
प्रदेश में शिक्षकों का सबसे बड़ा कैडर है। मुख्य क्षेत्रों में टिके शिक्षकों को लेकर प्रदेश के दूरदराज और अन्य क्षेत्रों में सेवारत शिक्षकों में भारी रोष रहता है। प्रदेश में शिक्षकों का सबसे बड़ा कैडर है।