उन्होंने कहा कि एक वर्ष के भीतर प्रदेश में 594 मेगावाट क्षमता की पांच जल विद्युत परियोजनाओं का कार्य पूरा होने वाला है। इसके अतिरिक्त 307 मेगावाट क्षमता की 11 अन्य परियोजनाएं भी एक वर्ष के भीतर पूरी होंगी।
हिम ऊर्जा आगामी एक वर्ष के दौरान 34.20 मेगावाट की कुल क्षमता के 19 लघु और छोटी परियोजनाओं का कार्य पूरा कर लेगी। मुख्यमंत्री ने उद्योग विभाग के निवेश लक्ष्यों को पूरा करने की समीक्षा करते हुए कहा कि
प्रदेश में औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने के लिए मौजूदा उद्योगों पर विद्युत शुल्क को लघु उद्योगों के लिए चार प्रतिशत से दो प्रतिशत तथा मध्यम उद्योगों के लिए 10 से सात प्रतिशत तक कम किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अनेक मानव निर्मित तथा प्राकृतिक झीलें हैं इसमें जल क्रीड़ाओं की संभावनाओं को तलाशा जाएगा। मंडी जिले के पंडोह बांध को भी पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा।
इसी प्रकार लारजी, भाखड़ा बांध जैसे अन्य जलाशयों को भी पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के प्रयास होंगे। बैठक में बताया गया कि आगामी एक वर्ष के दौरान प्रदेश में चार रज्जु मार्गों को संभावित उद्यमियों को आवंटित किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त धर्मशाला - मैकलोड़गंज रज्जु मार्ग का कार्य एक वर्ष के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। मुख्य सचिव विनीत चौधरी, अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकांत बाल्दी, अतिरिक्त मुख्य
सचिव पर्यटन राम सुभग सिंह, वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी संजय कुंडू, प्रधान सचिव उद्योग आरडी, धीमान, वित्त सचिव अक्षय सूद, निदेशक पर्यटन विभाग राकेश कंवर, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव डीसी राणा इस दौरान मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री डेशबोर्ड के जरिये लोग अपनी शिकायतों और मांगों को सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचा सकेंगे। मुख्यमंत्री कार्यालय एनआईसी के साथ मिलकर राइट टू सीएम फीचर में बदलाव किए हैं।
इससे ई समाधान के तहत मुख्यमंत्री को सीधे आने वाली शिकायतों को वे खुद पढ़कर विभागीय सचिवों को भेजेंगे। अभी तक सरकार की वेबसाइट हिमाचल डॉट एनआईसी डॉट इन पर अभी राइट टू सीएम फीचर तो है, लेकिन उसमें क्लिक करने पर केवल सुझाव ही मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजे जा
सकते थे। अब मुख्यमंत्री कार्यालय को सीधे शिकायत भेजी जा सकेगी। हालांकि इसमें ऐसा प्रावधान किया गया है कि मुख्यमंत्री को पहली शिकायत नहीं भेजी जा सकेगी। पहली शिकायत ई समाधान के जरिये विभाग को करनी होगी।
वहां से समाधान न होने पर विभाग को भेजी शिकायत के नंबर व अपना मोबाइल नंबर दर्ज कराकर मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी जा सकेगी। इसके बाद शिकायतों को खुद पढ़कर मुख्यमंत्री कार्रवाई के लिए निर्देश देंगे।