किन्नौर के मस्तरंग में आईटीबीपी के जवानों के साथ बातचीत करते राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर।
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राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि जवान विकट भौगोलिक परिस्थितियों में रहकर हमारी देश की सीमाओं की सुरक्षा कर रहे हैं। इस कारण हमें प्राकृतिक खूबसूरती वाले सीमांत क्षेत्रों में भ्रमण करने का मौका मिल रहा है। राज्यपाल किन्नौर प्रवास के दौरान दूसरे दिन पर्यटन स्थल सांगला की रक्षम पंचायत के साथ लगते मस्तरंग पहुंचे। उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल के महिला और पुरुष जवानों से भेंट की और कुशलक्षेम जाना। जवानों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि मस्तरंग जैसा नाम है, वैसा ही खूबसूरत और सुकून देने वाला है। उन्होंने भविष्य में परिवार के साथ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल की इस चौकी में रुकने की भी इच्छा जताई। आईटीबीपी जवानों को राखी बांधकर उनका हौसला बढ़ाया। कहा कि उन्हें रक्षाबंधन के दिन आना था, मगर नहीं पहुंच सके।
राज्यपाल देश के आखिरी गांव छितकुल के साथ लगते आईटीबीपी और सेना के कैंप नगस्ती पहुंचे। यहां जवानों ने उनका सलामी देकर स्वागत किया। राज्यपाल ने कहा कि ये राखियां गोवा से लाई गई हैं। वह गोवा में रहते हैं। हर वर्ष कुछ संस्थाओं की मदद से राखियां इकट्ठा करते हैं। ये राखियां गोवा से बच्चों ने भेजी है। उन्होंने ब्रिगेडियर प्रेम सिंह का भी आभार जताया।
किन्नौरी टोपी, ढोल-नगाड़ों से हुआ भव्य स्वागत
छितकुल गांव में राज्यपाल का ग्रामीणों ने किन्नौरी टोपी, खाताक और फूलमालाएं पहनाकर कर वाद्ययंत्रों की धुनों पर स्वागत किया। उन्होंने एक घर में नमकीन चाय की चुस्की ली और किन्नौरी व्यंजन थिसपोले यानी किन्नौरी नमकीन जलेबी का लुत्फ लिया।