राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र की संस्कृति, परंपरा और रीति-रिवाज समृद्ध हैं। यहां के लोगों ने अपनी इस पहचान को कायम रखा है। शुक्रवार को राज्यपाल काजा में जनजातीय संस्कृति से भी रूबरू हुए। एडीएम मोहन दत्त ने उन्हें पारंपरिक वस्त्र भेंटकर सम्मानित किया।
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर शुक्रवार को एशिया के सबसे ऊंचे गांव कौमिक पहुंचे। उन्होंने चीन सीमा से सटे लांगचा, हिक्किम, ताबो और कीह गोंपा का भी दौरा किया। राज्यपाल ने स्थानीय लोगों से बातचीत कर वहां की संस्कृति के बारे में जाना। उन्होंने लोगों की समस्याएं भी सुनीं।
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राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र की संस्कृति, परंपरा और रीति-रिवाज समृद्ध हैं। यहां के लोगों ने अपनी इस पहचान को कायम रखा है। शुक्रवार को राज्यपाल काजा में जनजातीय संस्कृति से भी रूबरू हुए। एडीएम मोहन दत्त ने उन्हें पारंपरिक वस्त्र भेंटकर सम्मानित किया।
राज्यपाल ने स्थानीय प्रशासन के साथ बैठक कर प्रदेश सरकार की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने लांगचा में छेरिंग डोलमा और गटूक छोडन को गृहिणी सुविधा योजना के तहत गैस कनेक्शन और चूल्हा वितरित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिलाओें को धुएं से छुटकारा दिलाने तथा पर्यावरण संरक्षण में हिमाचल गृहिणी सुविधा योजना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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तीन वर्षों में सरकार ने राज्य में योजना के तहत 2.85 लाख महिलाओं को निशुल्क गैस कनेक्शन दिए हैं। राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल सही मायनों में सुदूर क्षेत्रों में बसता है। वह कोशिश करेंगे कि राज्य के हर जिले का दौरा कर लोगों से मिलें। हिमाचल की संस्कृति को नजदीक से समझने के साथ लोगों की समस्याओं को भी जान सकेंगे।
स्थानीय लोगों ने कुछ समस्याओं से उन्हें अवगत करवाया है। वे इनका हल करने का हरसंभव प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। नियोजित पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से रोजगार बढ़ने के साथ आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। उनके साथ लेडी गवर्नर अनघा आर्लेकर भी मौजूद रहीं।