हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल उर्मिला सिंह अब पूरी तरह विदाई के मूड में आ गई है। जनवरी 2015 में उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है। बुधवार को ज्वालामुखी मंदिर में दर्शन करने के बाद कहा कि हिमाचल के कार्यकाल में लोगों का पूरा सहयोग मिला। माता का बुलावा जब भी आएगा, उस समय मंदिर आएंगी।
केंद्र में सत्ता परिवर्तन से बाद से तकरीबन सभी राज्यों के राज्यपालों को बदला जा रहा है। हालांकि प्रदेश के राज्यपाल के बदलने को लेकर कोई चर्चा नहीं रही, लेकिन उनका अब कार्यकाल खत्म हो रहा है। ऐसे में उनका जाना लगभग तय माना जा रहा है। ज्वालामुखी मंदिर दर्शन करने के बाद इसका संकेत खुद उर्मिला सिंह ने भी दिया। उन्होंने अनौपचारिक भेंट वार्ता में कहा कि हिमाचल के शक्तिपीठ शांति के प्रतीक हैं।
वह इससे पूर्व भी तीन बार ज्वालामुखी आई हैं। बताया कि उनका कार्यकाल जनवरी में समाप्त हो रहा है। पूरे प्रदेश में उनके कार्यकाल के दौरान बहुत प्यार और सम्मान मिला। इसके लिए उन्होंने हिमाचल के लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब भी उन्हें मां का बुलावा आता है तो वह मैया के दर्शन करने पहुंच जाती हैं। भविष्य में भी जब बुलावा आएगा तो वह जरूर दर्शन को पहुंचेंगी।
इससे पहले राज्यपाल उर्मिला सिंह ने मां ज्वाला की पवित्र ज्योतियों की विधिवत पूजा अर्चना कर मां का आशीर्वाद मांगा और मां ज्वाला के गर्भगृह में ज्योति कुंड के बारे में जानकारी ली। पुजारी महासभा प्रधान एवं मंदिर ट्रस्ट प्रधान दिव्यांशु भूषण ने उन्हे मां ज्वाला का सिरोपा भेंट किया।
इस अवसर पर एसडीएम देहरा विनय कुमार, डीएसपी देहरा रेणु शर्मा, मंदिर अधिकारी देवी राम, सहायक मंदिर अधिकारी जुगल किशोर शर्मा, मंदिर न्यास सदस्य पवन शर्मा, संजीव सूद, सुरेंद्र काकु, प्रेमानंद, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा, राजेंद्र राणा, युकां अध्यक्ष नीरज व मंदिर कर्मचारी संघ प्रधान शमशेर सिंह, राणो देवी, कमल ठाकुर, बलदेव, मनोहर, देशराज, प्रीतम, मुकंद, अशोक, राजकुमार, जोगिंद्र, पिंकू, भानू और गुड्डू आदि मौजूद रहे।
ज्वालाजी मंदिर में सीढ़ियों की जगह बने रैंप: राज्यपाल
माता ज्वालाजी में माथा टेकने आई हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल उर्मिला सिंह ने मां ज्वाला जी के दरबार तक सीढ़ियों की जगह रैंप बनाए जाने की इच्छा जताई है। विधायक संजय रतन ने उन्हें आश्वस्त किया कि इस कार्य के लिए जरूरी प्रयास किए जाएंगे।
ज्वालाजी मंदिर में 10 वर्ष पूर्व केवल 27 सीढ़ियां थीं, जिनसे मंदिर तक पहुंचा जा सकता था, लेकिन मौजूदा समय में हुए परिवर्तन के बाद मंदिर प्रशासन ने सुगम रास्ते को और कठिन बना दिया। वर्तमान समय में ज्वालाजी मंदिर तक पहुंचने के लिए 67 सीढ़ियां चढ़कर जाना पड़ता है।
श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए राज्यपाल ने इन सीढ़ियों के स्थान पर रैंप की व्यवस्था करने संबंधी विचार स्थानीय विधायक संजय रतन के समक्ष रखा है।