हिमाचल हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बावजूद मंगलवार को राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने आखिरकार सूबे के अवैध भवनों को वैध करने वाले विवादित टीसीपी संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस बिल को लेकर राज्यपाल करीब साढे़ चार महीने ऊहापोह की स्थिति में थे।
उन्होंने सरकार से पूछा था कि अवैध भवन निर्माण के लिए जिम्मेदार अफसरों पर सरकार क्या कार्रवाई करेगी? सरकार की ओर से संतोषजनक उत्तर न मिलने के बावजूद राज्यपाल ने इस विधेयक को ठीक उसी रूप में मंजूरी दी है, जैसा कि यह विधानसभा में पारित हुआ था।
इस विधेयक के कानून बनने के बाद अब नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए 30 हजार से ज्यादा भवनों को नियमित करने का रास्ता साफ हो गया है। चुनावी साल में मंजूर हुए इस विधेयक पर कांग्रेस और भाजपा दोनों में श्रेय लेने की होड़ लग जाएगी।
हाईकोर्ट ने की थी ये सख्त टिप्पणी, लोग कर रहे थे विरोध
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में इस विधेयक को 27 अगस्त 2016 को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद हिमाचल हाईकोर्ट ने अवैध भवनों को नियमित करने वाले विधेयक को गैर कानूनी ठहराते हुए कहा था कि अवैध निर्माण नियमित नहीं किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने अपनी तलख टिप्पणी में यहां तक कहा था कि सरकारी मशीनरी का पहले अवैध कब्जे करने की छूट देना और फिर नियमित करना वास्तव में संवैधानिक मशीनरी का फेल होना दर्शाता है। हाईकोर्ट की टिप्पणी और आम पब्लिक के सख्त विरोध के बावजूद राजभवन ने इस विधेयक को मंजूरी देने में हिचक रहा था।
जबकि, सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता बार-बार इसे मंजूरी दिलाने के लिए राजभवन पर दबाव बना रहे थे। इसके बाद राजभवन ने इस पर छह आपत्तियां लगाईं। सरकार ने बीते दिनों ही इस संबंध में गोलमोल जवाब दिया जिसके बाद मंगलवार को इस विधेयक को मंजूरी दे दी गई।
अब ये विधेयक भी अटका है राजभवन में
हिमाचल राजभवन में लंबे समय से खेल विधेयक भी अटका हुआ है। एचपीसीए और खेल संघों पर शिकंजा कसने के लिए विधानसभा में पारित हुए इस विधेयक पर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है।
प्रदेश सरकार इस विधेयक पर जल्द कोई फैसला चाहती है जबकि विपक्षी दल भाजपा इसका विरोध कर रहा है। इस विधेयक पर सरकार और राजभवन में कई बार टकराव की स्थिति भी पैदा हो चुकी है।