जिनके जीवन में अनुकूलता होती है, वह व्यक्ति सुखी है, मन के विपरीत कार्य दुखी करता है। जहां त्याग है वहां सुख है, और जहां वियोग है वहां दुख है। उन्होंने कहा कि ईर्ष्या, घृणा, असंतुष्टि, क्रोध, शंका दुख का कारण है।
ऐसा व्यक्ति कभी सुखी नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि योग शास्त्र में सुखी रहने के उपाए बताए गए हैं, जिनमें अच्छे व्यक्तियों का सानिध्य दीन-दुखियों की सेवा और दुष्टों की उपेक्षा करना शामिल है। साइंटिस्ट एंड इंजीनियर विंग माउंट आबू के उपाध्यक्ष मोहन सिंघल ने राज्यपाल का स्वागत किया।
राष्ट्रीय समन्वयक भारत भूषण ने खुशनुमा जिंदगी विषय पर अपने विचार रखे। प्रकाश ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस मौके पर राज्यपाल की धर्मपत्नी दर्शना देवी, राज्यपाल के सलाहकार डॉ. शशिकांत शर्मा और अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।