राज्यपाल आचार्य देवव्रत कहना है कि गुरुकुल के फार्म में जीरो बजट खेती के प्रयोग सफल और परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। हिमाचल में छोटी काश्त के खेत हैं। किसान-बागवान इसे आसानी से अपना सकते हैं। छोटे खेतों और बगीचों में देखभाल करना आसान है।
जिला उपायुक्तों ने खुद परिणाम देखे हैं। अब उन्हें जिला मुखिया होने के नाते किसानों को शून्य बजट खेती के लिए प्रेरित करना चाहिए। शून्य बजट खेती अपनाकर कि सान गन्ने की बिजाई ऐसे करें ताकि दो कतारों के बीच में तीन किस्म की सब्जियां उगा सकें।
शून्य खेती अपनाने के लिए गोबर और रासायनिक खाद की जरूरत नहीं रहती। खेतों में डाला जाने वाला घोल तैयार करने के लिए दो सौ लीटर पानी में 8 से 10 किलो देसी गाय का गोबर, दो किलो गुड़ और दो किलो किसी भी दाल का बेसन ड्रम में डालकर घोल तैयार कर लें। इसे तीन दिन तक हर रोज क्लाक वाइज डंडे से घुमाएं। इसे खेतों में खाद के बदले इस्तेमाल कर सकते हैं।
छिड़काव के लिए घोल- फसलों में छिड़काव के लिए ज्यादा पुरानी लस्सी का घोल तैयार करें। इसमें नीम, धतुरा और मिर्च का घोल भी मिला दें। जरूरत के अनुसार छिड़काव करें और फसलों को कीटों से बचाएं। ऐसा करने से छिड़काव के लिए दवाओं के खर्च से बचा जा सकता है।