राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कृषि विवि के दीक्षांत समारोह में धर्म के नाम पर आडंबर करने वालों को खरी खोटी सुनाई। उन्होंने कहा कि धर्म को दाढ़ी और मूंछ के नाम पर बांट दिया गया है। मूंछ काट दो फलां धर्म का हो गया और दाढ़ी रख ली तो फलां धर्म का और दोनों साफ कर दो वह किसी और धर्म का। सफेद और लाल चोगा पर भी अपने-अपने धर्म का अधिकार है। उन्होंने कहा कि क्या इसे धर्म कहते है कि आज लोग आपस में खून की नदियों बहा रहे हैं और गर्व महसूस कर रहे हैं। ऐसा काम गरीब लोगों के गांवों से नहीं, बल्कि एक प्रबुद्ध समाज कर रहा है।
धर्म तो वह होना चाहिए कि जब दूसरा कोई उसका बुरा नहीं चाहता तो वह भी उसका क्यों बुरा चाहे। उन्होंने कहा कि आज लोग धर्म के मूल सिद्धांतों को भूल चुके हैं। मानवता रो रही है। उन्होंने कहा कि आज अधिकार की बात तो होती है, लेकिन निष्ठा से समाज में परिवर्तन की बात कोई नहीं करता। वे लोग गाय के नाम पर बवंडर मचा रहे हैं जिनके घर में गाय तक नहीं है।
दीक्षांत समारोह में 212 होनहारों को सम्मान
कृषि विवि पालमपुर में रविवार को 13वां दीक्षांत समारोह मनाया गया। इसकी अध्यक्षता राज्यपाल एवं विवि के कुलाधिपति आचार्य देवव्रत ने की। समारोह में डिग्री हासिल करने वाले 346 छात्रों में से समारोह में 212 छात्र-छात्राएं शामिल हुईं। इसमें पांच ने पीएचडी, 65 ने स्नातकोतर तथा 142 स्नातकों ने डिग्री हासिल की। राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह की परंपरा प्राचीन काल से प्रचलित है।
प्राचीनकाल में गुरुकुल आश्रम में अध्ययन की समाप्ति के बाद दीक्षांत समारोह की बजाय समावर्तन संस्कार आयोजन की प्रथा थी। कहा कि इस सुअवसर पर जिन छात्रों ने शपथ ग्रहण की है, उसे अपने मस्तिक में समायोजित करें। जीवन की विपरीत परिस्थितियों में उच्च आदर्शों के प्रति पूर्ण निष्ठा बनाए रखने में यह शपथ आपको संबल प्रदान करेगी और अपने विकास पथ पर निरंतर अग्रसर रहेंगे। उन्होंने राज्य को अनाज एवं सब्जी फसलों के बीज मामले में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य विवि ने कई महत्वपूर्ण पहल की है।
विवि के कुलपति डा. केके कटोच ने कहा कि कृषि विवि पालमपुर में चार कॉलेज हैं। कृषि कॉलेज की 13 विभाग, डा. जीसी नेगी पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान कॉलेज के 18, गृह विज्ञान कॉलेज के पांच और आधार भूत विज्ञान कॉलेज के चार विभाग हैं। कहा कि विवि में शोध, शिक्षा तथा प्रसार में बेहतर कार्य हो रहे हैं।
इन छात्रों को गोल्ड मेडल- ज्योति चौधरी, नीरज ठाकुर, दीक्षा परमार, ऋषव, विपाशा सूद, इशिता मेहता, गजाला नजीर को गोल्ड मेडल से नवाजा गया। विवि के डा. आदर्श कुमार को वेटरनरी एवं सर्जरी एंड रेडियोलॉजी की पीएचडी में साल 2006 में टॉपर रहने पर गोल्ड मेडल से सम्मानित किया।
जैविक खेती पर बल दें कृषि वैज्ञानिक
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि देश में हो रही गंभीर बीमारियों के लिए आज कीटनाशक और अत्यधिक रासायनिकों का उपयोग सबसे बड़ा कारण है। अगर इन पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसके लिए देश के कृषि वैज्ञानिकों को जैविक खेती पर बल देना होगा।
कृषि विवि पालमपुर में दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने कहा कि देश में पिछले 17 वर्षों से जैविक खेती को लेकर कोई गंभीर नहीं है। देश के कृषि वैज्ञानिकों को जैविक खेती पर प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि आज कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियां रासायनिक खादों और कीटनाशकों से बढ़ रही हैं।
साथ ही उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए भारतीय नस्लों की गाय को बचाना होगा। देश की गायों का दूध अमृत समान है। यही नहीं भारतीय गायों का गोबर और मूत्र भी खेती के लिए उत्तम है। आज कंपनियां हमें बीजों के नाम पर लूट रही हैं। इसलिए किसानों को अपने बीजों का संरक्षण करना होगा। हमारे बीजों की प्रजातियां लुप्त हो रही हैं। हमारे बीजों में बीमारियों से लड़ने की क्षमता अधिक होती है।
लिहाजा, इसे देख कृषि विवि में भी ऐसा विभाग होना चाहिए जो भारतीय बीजों का संरक्षण करें। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में जैविक खेती पर बल देना होगा। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में योगदान दे रही हैं। लेकिन, गर्व इस बात का है कि महिलाएं आज कृषि क्षेत्र में भी बेहतर कार्य कर रही हैं।
नहीं पढ़ा कृषि विवि का वक्तव्य- कृषि विवि पालमपुर में हुए 13वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कृषि विवि की ओर से लिखे गए वक्तव्य (भाषण) को नहीं पढ़ा। उन्होंने विवि के मंच से अपना ही भाषण दिया। उन्होंने इतना ही कहा कि विवि की ओर से लिखा गया भाषण तो आप सबको किताब में मिल गया होगा। अब वह इससे हट कर कहते हैं।