समाज में अपराध की प्रवृत्ति हमारी दुष्ट मानसिकता का परिणाम है और जहां पुलिस का डंडा मजबूत होता है वहां अपराध का रास्ता खुद ब खुद कमजोर हो जाता है। यह बात राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने शुक्रवार को शिमला के पीटरहॉफ में दो दिवसीय 46वीं अखिल भारतीय पुलिस विज्ञान कांग्रेस के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कही।
देवव्रत ने कहा कि आज का युग सूचना प्रौद्योगिकी का युग है और पुलिस के क्षेत्र में आधुनिक जानकारी की अधिक आवश्यकता है ताकि अपराध पर नजर रखी जा सके। कहा कि पुलिस के सामने आने वाली चुनौतियों पर इस तरह के सम्मेलनों के माध्यम से चिंतन कर समाधान का रास्ता खोजा जा सकता है।
उन्होंने शिक्षाविदें का आह्वान किया कि वे जिम्मेदारी से अपने कार्य का निर्वहन करें और भावी पीढ़ी में वह संस्कार दें जिससे सामाजिक चुनौतियां कम हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि अपराध को कम करने के साथ.साथ इस बात पर भी चिंतन होना चाहिए कि अपराधी क्यों पैदा हो रहे हैं। पुलिस अधिकारियों से अपील की कि वह जिम्मेदारी से अपने कर्त्तव्य का निर्वहन करें।
इससे पहले बीपीआरएंडडी के महानिदेशक एपी महेश्वरी ने पुलिस के क्षेत्र में शोध, विकास और डाटा विश्लेषण को प्रगतिशील संगठन का सूचक बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर पुलिस बल एक थिंक टैंक के तौर पर भी कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीकी तौर पर हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े हैं।
इस अवसर पर उन्होंने 46वीं अखिल भारतीय पुलिस विज्ञान कांग्रेस में पारित 6 प्रस्तावों की भी जानकारी दी। इससे पहले पुलिस महानिदेशक सीताराम मरडी ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा पुलिस विज्ञान कांग्रेस की दो दिवसीय कार्यशाला की विस्तृत जानकारी दी। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेन्द्र चैहान ने भी इस अवसर पर अपना संबोधन दिया। वहीं, ब्यूरो की संपत मीना ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।