हिमाचल राजभवन और सीएम कार्यालय के बीच अब कुलपतियों की नियुक्तियों के मामले में मतभेद सामने आया है। कृषि और बागवानी विश्वविद्यालयों के दोनों कुलपतियों को सेवा विस्तार देने की सीएम कार्यालय की सिफारिश को राजभवन ने ठुकरा दिया है। सरकार की तरफ से एक कैबिनेट मंत्री की पैरवी के बावजूद राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने दोनों कुलपतियों को एक्सटेंशन देने से मना कर दिया।
वे नए वीसी की नियुक्तियों का मामला नई दिल्ली भेज रहे हैं। डा. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के कुलपति डा. वीएस ठाकुर का टेन्योर 25 जुलाई को पूरा हो गया। अभी उनका तीन साल का सेवाकाल बचा हुआ है। पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. केके कटोच का कार्यकाल 30 जुलाई को पूर्ण हो गया है।
दोनों कुलपतियों के तीन साल के सेवाकाल के पूरा होने के बाद सीएम कार्यालय से इनकी सेवाएं आगे जारी रखने को फाइलें राजभवन भेजी गईं, मगर इन संस्तुतियों पर राजभवन ने गौर नहीं किया है। इसके लिए राज्यपाल ने नए आवेदन मांग लिए हैं। दोनों ही विश्वविद्यालयों के लिए दर्जनों आवेदन आ चुके हैं। इनमें राज्य से बाहर से भी आवेदन आए हैं।
राज्यपाल के पसंदीदा नामों की होगी पैरवी
राज्यपाल आचार्य देवव्रत
- फोटो : फाइल फोटो
सूत्रों ने बताया कि कार्यकाल पूरा करने वाले दोनों ही कुलपतियों डा. वीएस ठाकुर और डा. केके कटोच ने भी आवेदन किए हैं। राजभवन से कुलपतियों की ताजा नियुक्तियों के लिए आवेदनों की अब नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद महानिदेशालय में स्क्रूटिनी होगी। स्क्रूटिनी करने वाली टीम में हिमाचल राजभवन से भी अधिकारी जाएंगे।
माना ये जा रहा है कि राज्यपाल की ओर से उनके पसंदीदा नामों की पैरवी की जा सकती है। ये नए नाम ही हो सकते हैं। बता दें कि बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स ने तो नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति डा. वीएस ठाकुर को सेवा विस्तार देने के लिए राज्यपाल आचार्य देवव्रत से भेंट भी कर ली। सरकार ने प्रधान सचिव बागवानी जेसी शर्मा को नौणी और सचिव कृषि अनुराधा ठाकुर को पालमपुर विवि का कार्यभार दिया है।
बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स ने बताया कि वे इस मामले में राज्यपाल से मिली थीं। नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति का सेवाकाल अच्छा रहा है। इसलिए अच्छा होता कि उनकी सेवाएं जारी रहतीं। राज्यपाल के सचिव पुष्पेंद्र राजपूत से प्रतिक्रिया जानने का प्रयास किया गया, मगर वे उपलब्ध नहीं हो पाए।
आठ-नौ माह से भर्तियों की फाइलें भी रुकीं
राजभवन शिमला में पिछले आठ-नौ महीनों से भर्तियों की फाइलें भी रुकी पड़ी हैं। दरअसल, बागवानी विश्वविद्यालय नौणी और कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में दर्जनों खाली पदों पर रिक्तियों के लिए मंजूरी का मामला राजभवन भेजा था। इन भर्तियों के पीछे तर्क यह था कि रिक्त पदों के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, मगर अभी तक राजभवन शिमला ने इस पर फैसला नहीं लिया है।