राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की भूमि और वातावरण सीबाक्थार्न (छरमा) के उत्पादन के लिए उपयुक्त है। वन विभाग किसानों को सीबाक्थार्न के उत्पादन को लेकर प्रोत्साहित करे। कि सान प्राकृतिक खेती अपनाकर आय को दोगुना कर सकते हैं।
राज्यपाल ने मंगलवार को यहां पीटर हाफ में कार्यशाला के दौरान कहा कि यह पौधा अहम है और इससे दवा बन सकती है। सीबाक्थार्न एसोसिएशन ऑफ इंडिया(एसएआई) के अध्यक्ष डॉ. आरसी स्वाहनी ने बताया कि सीबाक्थार्न को लेकर लंबे समय से चर्चा हो रही है।
छरमा का सबसे ज्यादा उत्पादन लेह, हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में होता है। डीआरडीओ ने छरमा से लेह बैरी जूस बनाया और सैनिकों को दिया। सीबाक्थार्न हृदय रोगों से भी बचाता है। सीबाक्थार्न का उत्पादन कम है और मांग ज्यादा है।
इसकी पैदावार कैसे बढ़ाई जाए, यह सबसे बड़ी चुनौती है। जीबी पंत विवि पंतनगर के कुलपति प्रो. तेज प्रताप ने कहा कि सीबाक्थार्न जंगली पौधा है और लाहौल-स्पीति में होता है।
प्रदेश काउंसिल फॉर साइंस टेक्नोलॉजी एंड एनवायरमेंट के बायो डायवर्सिटी बोर्ड की वरिष्ठ वैज्ञानिक सुभ्रा बेनर्जी ने कहा कि सही जानकारी देकर सीबाक्थार्न का उत्पादन बढ़ा सकते हैं