जानकारी के अनुसार चैलचौक की एक गैर सरकारी संस्था ने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय गोहर से विकास खंड में स्थित सभी आंगनबाड़ी केंद्रों का 5 साल का रिकार्ड मांगा था।
आवेदक के अनुसार मांगी गई सूचना बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय गोहर आज तक तैयार नहीं कर पाया। सूचना उपलब्ध कराने के बजाय परियोजना अधिकारी ने बिना सूचना तैयार किए 8 मई, 2018 को संस्था के नाम पर 30,34,738 रुपये और डाक का खर्च 73150 रुपये का बिल भेज दिया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी ने सूचना तैयार करने के लिए 9 लाख रुपये मांगे हैं, जबकि इसके तीन गुना से ज्यादा 30,34,738 रुपये संस्था से सूचना के शुल्क के रूप में मांगे हैं। पत्र में फोटो कापी का प्रति पेज मूल्य 20 रुपये मांगा है।
पत्र मिलने के बाद संस्था की टीम चेकबुक लेकर 14 मई को जनसूचना अधिकारी गोहर के कार्यालय में पहुंची तो पाया कि सूचना तैयार ही नहीं हैं। इस बाबत पूछने पर जनसूचना अधिकारी गोहर ने बताया कि मांगी गई सूचना तभी तैयार होगी, जब आप 30,34,738 रुपये अग्रिम जमा करवाएंगे।
गैर सरकारी संस्था के अध्यक्ष सुरेश कुमार का आरोप है कि यह संस्था को सूचना न लेने के लिए विवश करने या सूचना के नाम पर डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार परियोजना अधिकारी सूचना नहीं देे रही हैं, उससे लगता है कि विकास खंड गोहर के आंगनबाड़ी केंद्रों में घोटाला हुआ है।
राइट एनजीओ ने उपायुक्त मंडी को लिखे एक पत्र में इस मामले में संलिप्त दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग उठाई है।
बाल विकास परियोजना अधिकारी गोहर सीमा ठाकुर ने कहा है कि सूचना का अधिकार कानून के अंतर्गत विभाग से मांगी गई सूचना की फीस 30 लाख रुपये के करीब बनती है। प्रावधान के अनुसार प्रार्थी से राशि जमा करवाने हेतु पत्र भेजा गया है।