सिद्धार्थ शर्मा अपने पिता के बाद चौथी पीढ़ी की सैनिक परंपरा को आगे बढ़ाने वाले ऑफिसर हैं। सिद्धार्थ के परदादा, दादा और पिता तीनों ने ही भारतीय सेना की सेवा को चुना। परिवार को उम्मीद है कि सिद्धार्थ चौथी पीढ़ी के साथ अपनी पांचवीं पीढ़ी को भी राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पित करते हुए आगे बढ़ाएंगे।
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के उपमंडल बंगाणा के ठठूंह के सिद्धार्थ शर्मा ओटीए (ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी) गया से पास आउट होकर सेना में शामिल हो गए हैं। सिद्धार्थ शर्मा अपने पिता के बाद चौथी पीढ़ी की सैनिक परंपरा को आगे बढ़ाने वाले ऑफिसर हैं। सिद्धार्थ के परदादा, दादा और पिता तीनों ने ही भारतीय सेना की सेवा को चुना। परिवार को उम्मीद है कि सिद्धार्थ चौथी पीढ़ी के साथ अपनी पांचवीं पीढ़ी को भी राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पित करते हुए आगे बढ़ाएंगे। ओटीए गया से पासआऊट होकर सेना में लेफ्टिनेंट बने सिद्धार्थ शर्मा के परदादा स्वर्गीय पंडित लछमण दास स्वतंत्रता सेनानी रह चुके हैं।
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दादा सतपाल शर्मा भी सेना में सेवाएं दे चुके हैं। वहीं, पिता संजय शर्मा वर्तमान में कर्नल के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सिद्धार्थ की बहन साक्षी शर्मा का कहना है कि भाई का एक सपना था कि सेना में अधिकारी बनूं। दादी कृष्णा शर्मा और माता कुसुम भी सिद्धार्थ की इस कामयाबी पर फूले नहीं समा रही हैं। दादी कृष्णा शर्मा का कहना है कि पोता सिद्धार्थ शुरू से ही अपने लक्ष्य के प्रति संजीदा रहा है। सिद्धार्थ के मामा और ब्लॉक कांग्रेस कमेटी कुटलैहड़ के अध्यक्ष विवेक ने कहा कि सिद्धार्थ ने लेफ्टिनेंट बनकर समूचे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। सिद्धार्थ अपने पिता और दादा को अपना रोल मॉडल मानते हैं।