राज्य सरकार ने मुफ्त दवा योजना के लिए सभी जिलों को बजट जारी कर दिया है। प्राइमरी हेल्थ सेंटर से लेकर सभी बड़े अस्पतालों में मरीजों को 56 तरह की दवाएं मुफ्त मिलेंगी। अगर डॉक्टर मुफ्त दवाओं के बजाय बाजार में मिलने वाली दवा पर्ची पर लिखता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इसके लिए मरीज सीएमओ से शिकायत कर सकते हैं। राज्य सरकार ने निशुल्क दवा नीति के तहत सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को 66 वस्तुओं इनमें 56 दवाएं एवं 10 उपभोगीय सामग्री को मुफ्त देने का निर्णय लिया है।
मुफ्त में वितरित की जाने वाली दवाओं में दिल की बीमारियों से जुड़ी दवा एटनोलोल, एमोलिडिपाइन और एनालपरिल के अलावा पैरासिटामौल, सिट्राजिन और ओआरएस भी शामिल है। मरीजों को टैबलेट, इंजेक्शन, क्रीम, सिरप और कैप्सूल भी दिए जाएंगे।
इन बीमारियों की मिलेंगी दवा
सांस की बीमारी, गैस, कब्ज, सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार, विटामिन, बी कांप्लेक्स, एंटी इंफेक्शन, एंटी रैबिज वैक्सीन, ग्लूकोज, कैल्शियम, एंटी स्नेक इंजेक्शन, मूत्र से जुड़ी बीमारियां, खून को प्रभावित करने वाले बीमारियों की दवाएं मुफ्त में दी जाएंगी।
अन्य सामान में बैंडऐज, कॉटन, पोविडोन आयोडाइन सॉल्यूशन, सिरिंज विद निडल, ग्लवज, लियूकोप्लास्ट और वेन फ्लो भी उपलब्ध करवाया जाएगा।
'सरकार के आदेशानुसार सभी सीएमओ को दवा खरीद के लिए बजट जारी कर दिया गया है। सीएमओ और बीएमओ को योजना के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन का जिम्मा दिया गया है। दवा न मिलने की सूरत में मरीज संबंधित अधिकारी को शिकायत करें। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।'- डॉ. डीएस गुरुंग, स्वास्थ्य निदेशक