बटालियन कमांडेंट बताते हैं कि परिसर के ही एक बड़े हॉल में नि:शुल्क पुलिस पाठशाला की शुरुआत की। शुरू के पहले दो रविवार बच्चों की संख्या काफी कम थी। लेकिन पुलिस स्टाफ के पढ़ाने की अच्छी शैली के चलते बच्चों ने एक-दूसरे को इसकी जानकारी दी और वर्तमान में दसवीं के 102 विद्यार्थी कोचिंग ले रहे हैं। इनमें भी आधी से ज्यादा छात्राएं हैं।
25 रविवार में बांटा पूरा सिलेबस- तीनों विषय के पूरे सिलेबस को 25 रविवार के हिसाब से बांट दिया है। बच्चों को उसी के हिसाब से चैप्टर पढ़ाए जाते हैं और अगले रविवार के लिए होमवर्क दिया जाता है। लक्ष्य है कि 20 रविवार पूरे होने तक कोर्स पूरा करा लिया जाए। अंतिम पांच रविवार में रिवीजन व टेस्ट होंगे।
गुरु बनने से पहले जवानों को देनी पड़ी परीक्षा- पुलिस स्टाफ में पढ़ाने की काबिलियत परखने के लिए इच्छुक जवानों की स्क्रीनिंग कर उनकी पढ़ाने की काबिलियत को डमी क्लास के जरिये चेक किया गया। इसके बाद सिपाही अंकुश, योगेंद्र के अलावा रोहित और रजनीश का चयन विज्ञान और गणित पढ़ाने के लिए किया। बटालियन के डीएसपी बलदेव शर्मा एचपीएस बनने से पहले अंग्रेजी के अध्यापक थे, इसलिए अंग्रेजी पढ़ाने की जिम्मेदारी उन्होंने खुद ही ले ली।