फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shimla News: पहले 50 हजार पर 10 हजार मुनाफा दिखाया फिर सेवानिवृत्त अधिकारी से 37 लाख की धोखाधड़ी

विज्ञापन
विज्ञापन
एक्सक्लूसिव...
विज्ञापन

व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर शेयर बाजार में निवेश कर कई गुना मुनाफे का दिया झांसा, अब फोन स्विच ऑफ
साइबर अपराधियों के जाल में फंसकर पंथाघाटी के बुजुर्ग हुए साइबर धोखाधड़ी के शिकार
देवेंद्र ठाकुर
शिमला। शेयर बाजार में निवेश के नाम पर राजधानी में रहने वाली सेवानिवृत्त अधिकारी के साथ 37 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने पहले बुजुर्ग को मुनाफे का झांसा देकर व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा और इसके बाद 50,000 रुपये के निवेश पर कुछ ही दिनों में 10,000 रुपये का मुनाफा दिखा दिया। इसी जाल में फंसकर बुजुर्ग ने लाखों रुपये की अपनी जिंदगी भर की जमापूंजी निवेश के नाम पर अपराधियों के खातों में ट्रांसफर कर दी, लेकिन जब वह अपनी रकम को निकालने की कोशिश करने लगे तो उन्हें अपने साथ हुई धोखाधड़ी का पता चला। साइबर क्राइम सेल शिमला ने अज्ञात लोगों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318 के तहत प्राथमिकी दर्जकर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस को दी शिकायत में पंथाघाटी में रहने वाले बुजुर्ग ने बताया कि अगस्त में उन्हें इक्विरस इन्वेस्टमेंट के नाम से शेयर बाजार में निवेश करने का प्रलोभन दिया गया। इसके बाद उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया। इसमें उन्हें निवेश को लेकर तरह-तरह के झांसे दिए गए। विश्वास करके उन्होंने पहले 50,000 रुपये का निवेश किया। कुछ ही दिनों में उन्हें दस हजार रुपये का मुनाफा दिखाई दिया। इससे विश्वास बढ़ा और उन्होंने कुछ ही दिनों में 37,00000 रुपये का निवेश कर दिया। शिकायतकर्ता ने बताया कि दो महीनों में ही उनकी रकम उन्हें मुनाफे के साथ 79,00000 रुपये दिखाने लगा।
विज्ञापन






इनसेट
पैसे निकालने के लिए मांगी 12 लाख रुपये की प्रोसेसिंग फीस
बुजुर्ग ने जब अपनी 79 लाख रुपये की रकम निकालने के लिए आवेदन किया तो उन्हें साइबर अपराधियों का फोन आया। उन्होंने बताया कि इतनी बड़ी रकम एक साथ नहीं निकाली जा सकती है और उन्हें इसके लिए 12,00000 रुपये की प्रोसेसिंग फीस देनी होगी। शिकायतकर्ता ने इस रकम को देने से इन्कार किया और कहा कि उनके मुनाफे और रकम से इस फीस को काटकर बकाया राशि उन्हें दे दी जाए लेकिन इसके बाद अपराधियों के फोन स्विच ऑफ हो गए। तब जाकर उन्हें अहसास हुआ कि साइबर धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं। इसके बाद उन्होंने मामले की सूचना साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर की। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता से निवेश से संबंधित रिकॉर्ड को कब्जे में लेकर उन बैंक खातों की पहचान की जा रही है जिनमें उन्होंने लाखों की रकम जमा करवाई थी।





कोट्स
-यदि कोई स्कीम कम समय में भारी या गारंटी मुनाफे का वादा करती है तो वह अक्सर स्कैम होता है। याद रखें, अधिक रिटर्न के साथ जोखिम भी जुड़ा होता है।
-ठग अक्सर यह कहते हैं कि यह ऑफर सिर्फ अगले कुछ मिनटों या घंटों के लिए है ताकि आप जल्दबाजी में बिना जांच किए पैसे लगा दें। निवेश में जल्दबाजी न करें।
-फोन कॉल, व्हाट्सएप या ईमेल पर अपना ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन, बैंक पासवर्ड या आधार कार्ड की जानकारी साझा न करें। कोई भी बैंक या वित्तीय संस्था फोन पर ऐसी जानकारी नहीं मांगती।
-किसी भी कंपनी या प्लेटफॉर्म में पैसे लगाने से पहले यह देखें कि वह भारत के वित्तीय नियामक (सेबी) या संबंधित अधिकृत संस्था के पास रजिस्टर्ड है या नहीं।
-सोशल मीडिया (टेलीग्राम, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक) पर बिना मांगे आने वाले निवेश विज्ञापनों, लुभावने ग्रुप्स या संदिग्ध लिंक्स पर क्लिक न करें।
-किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने फोन या कंप्यूटर में एनी डेस्क, टीम व्यूअर या कोई अन्य स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड न करें और न ही अपनी स्क्रीन किसी से शेयर करें।
विज्ञापन

-किसी भी नए या बड़े निवेश से पहले किसी प्रमाणित और पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से ही राय लें।





कोट्स
लोग शेयर बाजार और अन्य ऐसे किसी भी प्रलोभन में न आएं जिसमें उन्हें कुछ ही दिनों या महीनों में कई गुना मुनाफे की बात कही जाती है। सेबी से पंजीकृत संस्थानों के माध्यम से ही निवेश करें। अगर धोखाधड़ी हो जाए तो फौरन साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। पुलिस का हमेशा प्रयास रहता है कि बैंक खातों की पहचान कर ठगी की रकम को होल्ड करवाया जाए।
-शिव कुमार शर्मा, एसपी इंटेलिजेंस, सिक्योरिटी, साइबर क्राइम (अतिरिक्त कार्यभार)
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें