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चार हजार करोड़ की बागवानी को लगी इसकी नजर, सिर पीट रहे बागवान

Sun, 21 Jan 2018 12:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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हिमाचल में चार हजार करोड़ की सेब बागवानी पर मौसम का संकट गहराया गया है। बारिश और बर्फबारी न होने से सूबे के बागवान सिर पीट रहे हैं। चिलिंग ऑवर्स न होने से बागवान बगीचों में न तो तौलिए कर पा रहे हैं और न ही नई पौध रोप पा रहे हैं। जमीन में नमी नहीं होने से बगीचों में खुदाई समेत तमाम काम रुक गए हैं।

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हिमाचल प्रदेश में सेब बागवानी से करीब एक लाख परिवार सीधे तौर पर जुडे़ हुए हैं।बागवान सुरेंद्र लालटा ने बताया कि हिमाचल में बागवानी का करीब 85 फीसदी क्षेत्र बारिश पर निर्भर है। हिमाचल में शिमला, कुल्लू, किन्नौर, लाहौल के अलावा सिरमौर, कांगड़ा, मंडी और चंबा जिले के कुछ क्षेत्रों में सेब बागवानी होती है।

- सालाना सेब उत्पादन : 8 लाख मीट्रिक टन
- सेब बागवानी से जुडे़ परिवारों की संख्या : 1 लाख
- सेब का प्रति हेक्टेयर उत्पादन : 10 मीट्रिक टन तक

बागवानी के एक हजार करोड़ दांव पर

देव भूमि कुल्लू में हजारों हेक्टयेर कृषि व बागवानी पर संकट छा गया है। बागवानी विशेषज्ञ के मुताबिक जिला कुल्लू में करीब एक हजार करोड़ रुपये की बागवानी है और 95 फीसदी लोग इस पर निर्भर हैं। 

सेब बगीचों में नमी न होने से सेब के पौधे भी सूखने लगे है। शुष्क मौसम से सेब के बगीचों को वूली एफिड व सूली कीट ने हमला बोल दिया है। जनवरी माह खत्म होने को है और बागवान अभी तक सेब के तौलियों के साथ नए बगीचे नहीं लगा पा हैं।

घाटी में 30442 हेक्टेयर में बागवानी की जाती है जिसमें करीब 27 हजार हेक्टेयर में मात्र सेब के बगीचे ही लगाए गए है। बागवानी उद्यान विभाग कुल्लू के उपनिदेशक डॉ. राज कुमार शर्मा ने कहा कि अभी सेब के पेड़ पतझड़ अवस्था में हैं। ऐसे में सूखे से नुकसान का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है।

वसंत आने पर इसका पता लगाया जा सकता है। कृषि विभाग कुल्लू के उपनिदेशक रतन भारद्वाज ने कहा कि सूखे से रबी फसल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना शुरू हो गया है। जल्द बारिश नहीं हुई तो इसका असर उत्पादन पर निश्चित रूप से हो सकता है। 

बागवानी प्रबंधन पर भी लगी ब्रेक

लंबे समय से मौसम की बेरुखी ने प्रदेश के ऊपरी इलाकों के फलदार बगीचों में प्रबंधन की रफ्तार रोक दी है। बर्फबारी और बारिश न होने से सेब और अन्य फल उत्पादक क्षेत्रों में बागवान बगीचों के प्रबंधन को लेकर चिंतित हैं।

जिला शिमला के कोटगढ़, कुमारसैन, रामपुर, जिला कुल्लू के आउटर सिराज और 15 से 20 क्षेत्र के सेब उत्पादक चिंतित हैं। दिसंबर और जनवरी में बागवान पेड़ों की कटिंग करने के बाद नमी मिलते ही बगीचों में खाद डालने का काम पूरा कर लेते थे, लेकिन सूखे ने बागवानों के हाथ रोक दिए हैं।

बागवान चाहते हुए भी सेब, नाशपाती, बादाम, आड़ू, पलम और चेरी के पेड़ नहीं लगा पा रहे। जनजातीय जिला किन्नौर में सेब सहित अखरोट, बादाम, चुली, राजमाह, मटर और आलू की फसल की पैदावार पर सूखे से मार पड़ने की आशंका है। 

नौणी से खरीदे 80 हजार पौधे, अब रोपने के लाले

मौसम की बेरुखी किसानों और बागवानों पर भारी पड़ रही है। पहले से लगे पेड़ पौधों का हाल बुरा है। बागवानों ने इस सीजन में जो नए पौधे लिए हैं, वह भी अभी तक मिट्टी के नीचे ही दबे हुए हैं। उन्हें रोपने के लिए जमीन में पर्याप्त नमी नहीं मिल पा रही है।

इस वर्ष डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विवि नौणी से बागवानों ने सेब, नाशपाती, कीवी, पलम, खुमानी, सहित अन्य किस्मों के करीब 80 हजार पौधे खरीदे हैं। इन पौधों को जमीन पर रोपने के लिए बारिश का इंतजार हो रहा है।

बागवान तय नहीं कर पा रहे हैं कि पौधें लगाएं भी या नहीं। दरअसल 31 दिसंबर को जिला में हल्की बूंदा-बांदी हुई थी। तब से लेकर अब तक लोग बारिश व बर्फबारी के लिए तरस रहे हैं।

 
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नौणी विवि के बागवानी विशेषज्ञ ने दी ये सलाह

नौणी विवि के विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय बारिश न होने चिंता का विषय है। विशेषज्ञों ने किसानों को फलों और पौधों के तौलिए बनाने का कार्य आरंभ करने की सलाह दी है। साथ ही रोग व कीट ग्रस्त शाखाओं व अवांछनीय टहनियों को काटने और कटे भाग पर पेस्ट लगाने को कहा है।

बारिश न होने के चलते सिंचाई नहीं हो पा रही है। लिहाजा वैज्ञानिकों का कहना है कि तौलिया बनाने से पहले किसान बागवान गोबर की गली सड़ी खाद डालें। वर्तमान में जिले के बागवानों द्वारा सेब के पौधे लगाए गए हैं।

उन्हें रोजाना पानी दिया जाए। जिन क्षेत्रों में पानी की कमी है वह बागवान रोजाना लगाए गए पौधों में कम से कम दो बाल्टी पानी जरूर डालें। यह तब तक करना होगा जब तक पौधा जमीन में अच्छे से जड़ नहीं पकड़ता।

नौणी विवि के बागवानी व मौसम विभाग के विशेषज्ञ एमएस झांगटा ने बताया कि बारिश न होने से बागवानों को नुकसान हो सकता है। जिन क्षेत्रों में पानी की सुविधा उपलब्ध है वह पौधो में पानी जरूर लगाएं।
वहीं पानी की कमी वाले इलाकों में पौधो में कम से कम दो बाल्टी पानी जरूर डालें। बारिश से सेब की अवांछनीय टहनियों को काटने व तौलिए बनाने में कोई असर नहीं पड़ता। बागवान अपने इस कार्य को जारी रख सकते हैं।
 
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