प्रदेश कांग्रेस के बेलगाम नेताओं पर कार्रवाई का सिलसिला अभी थमेगा नहीं। सोशल मीडिया में आपत्तिजनक पोस्ट डालने और उसे सर्कुलेट करने पर तीन नेताओं को निलंबित किया जा चुका है और अब चार वरिष्ठ नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता पर कार्रवाई की तैयारी है।
लोकसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों की रिपोर्ट के आधार पर प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। पार्टी सूत्रों से मालूम हुआ है कि हाईकमान ने पहले ही साफ शब्दों में पार्टी प्रभारी रजनी पाटिल और प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर से कह दिया है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के जिन बेलगाम नेताओं ने नकारात्मक भूमिका निभाई है, उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाए।
ऐसे अनुशासनहीन नेताओं के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस के अलावा कांग्रेस हाईकमान के पास भी लोकसभा चुनाव के दौरान पुख्ता सबूतों के साथ शिकायतें भेजी गई हैं। कांग्रेस के चार वरिष्ठ नेताओं पर दूसरे चरण में अनुशासन की तलवार चलाई जानी है। इसके अलावा प्रत्याशियों से आने वाली विस्तृत रिपोर्ट का भी बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है।
प्रदेशाध्यक्ष राठौर ने इन शिकायतों को आधार मानकर कार्रवाई करनी आरंभ कर दी है। चुनावों के दौरान इन नेताओं ने पार्टी उम्मीदवारों को हराने में कोई कमी नहीं रखी और भाजपा प्रत्याशियों की परोक्ष रूप से मदद की जाती रही है। यह बात हाईकमान की समझ में भी आ गई है।
कांग्रेस हाईकमान के निशाने पर आया सोशल मीडिया ग्रुप
कांग्रेस हाईकमान के निशाने पर पीसीसी का आफिशियल सोशल मीडिया ग्रुप आ गया है। कांग्रेस के एक पूर्व अध्यक्ष इस ग्रुप के एडमिन हैं और इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ विवादित पोस्ट डालकर कुछ बेलगाम नेता अपने मन की भड़ास निकाल रहे हैं।
हाईकमान के निर्देश पर प्रदेश कांग्रेस ने जांच जारी कर दी है कि ये पोस्ट कौन डाल रहा है? किसके इशारे पर विवादित पोस्ट लगातार डाली जा रही हैं। माना जा रहा है कि ग्रुप एडमिन पर हाईकमान शिकंजा कसने की तैयारी में है।
सूत्रों से मालूम हुआ है कि हाईकमान के निर्देश पर प्रदेश कांग्रेस मामले की छानबीन में जुट गई है। पार्टी प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर के अध्यक्ष बनने के बाद से पीसीसी आफिशियल ग्रुप में सोशल मीडिया में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर निशाना साधा जाता रहा है।
यह सिलसिला लोकसभा चुनाव के दौरान भी जारी रहा। सोशल मीडिया के इस ग्रुप में केएकेए (काका) और केएवी (काव) को निशाना बनाया जाता रहा है। प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के नामों के पहले वर्ण को लेकर काका और काव संबोधित करके पोस्ट डालकर अनुशासनहीनता की सीमा रेखा पार की गई है।