राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्ति के लिए महज चार नए आवेदन ही आए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि के आखिरी दिन शाम तक कोई भी चर्चित नाम सामने नहीं आया। चार आवेदनों में दो चंडीगढ़ के वकीलों के आवेदन हैं तो दो अन्य भी आम आवेदक हैं। हालांकि, चर्चा यह भी रही कि अगर किसी प्रभावशाली व्यक्ति ने गुपचुप तरीके से आवेदन किया हो तो यह अलग बात हो सकती है, मगर संबंधित स्टाफ को शाम तक केवल चार आवेदनों के मिलने की ही जानकारी थी। सरकार ने इस पद को किसके लिए पुनर्विज्ञापित किया है। इसके पत्ते अभी पूरी तरह से नहीं खुले हैं। राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्त व्यक्ति को हाईकोर्ट के न्यायाधीश के बराबर सुविधाएं मिलती हैं। यह नियुक्ति तीन साल के लिए की जानी है।
राज्य सरकार के कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभागों ने इस संबंध में नए सिरे से विज्ञापन जारी किया है और 11 जुलाई तक आवेदन मांगे गए। इस पद के लिए एक बार इससे पहले भी छह मई तक आवेदन मांगे गए थे। इससे पहले सरकार के प्रशासनिक सुधार विभाग के पास करीब 45 आवेदन आए थे। पुराने आवेदकों में अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी धीमान, मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव आरएन बत्ता जैसे बड़े नाम भी हैं। इस बारे में 25 जुलाई को प्रदेश अतिथि गृह पीटरहॉफ शिमला में भी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर और नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री की त्रिसदस्यीय कमेटी की बैठक हुई। इसमें राज्य सूचना आयुक्त के रूप में तो एसएस गुलेरिया के नाम पर निर्णय ले लिया गया, मगर राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर फैसला नहीं हो पाया है। इसे 11 जुलाई को नए सिरे से आवेदन आने के बाद तक टाला गया।
कुछ बेरोजगारों ने भी किए आवेदन
चूंकि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए कोई भी ख्याति प्राप्त व्यक्ति आवेदन कर सकता है, इसलिए कुछ बेरोजगारों ने भी इसे नौकरी का पद मानकर इसके लिए आवेदन किए हैं।