हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर के विधानसभा क्षेत्र मेवा (वर्तमान में भोरंज) के पूर्व विधायक अमर सिंह चौधरी के कारण ही हिमाचल प्रदेश में पूर्व विधायकों को पेंशन की सुविधा प्राप्त हुई। विधायकी के बाद भी परिवार के पालन-पोषण के लिए अमर सिंह मेलों में चूड़ियां बेचते थे। अमर सिंह पहले वर्ष 1967 से 1972 तक जनसंघ, जबकि वर्ष 1977 से 1982 तक भाजपा की टिकट पर विधायक चुने गए।
पूर्व विधायकों की माली आर्थिक हालत को देखते हुए डॉ. यशवंत सिंह परमार की सरकार ने पेंशन प्रणाली की व्यवस्था की थी। वर्ष 1974 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार हमीरपुर में एक मेले में बतौर मुख्यातिथि भाग लेने पहुंचे थे। मेले के शुभारंभ के दौरान विभिन्न दुकानों का अवलोकन करते हुए उनकी नजर पूर्व विधायक अमर सिंह चौधरी पर पड़ी। अमर सिंह उस मेले में एक दुकान लगाकर चूड़ियां बेच रहे थे।
पूर्व विधायक को चूड़ियां बेचते हुए देख परमार ने उनसे पूछा तो उन्होंने बताया कि विधायकी के बाद अब आय का कोई साधन नहीं बचा। वहीं परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेवारी के चलते मेलों में दुकानदारी चलाते हैं। परमार से यह देखा नहीं किया। उन्होंने शिमला पहुंचते ही प्रदेश सरकार की अगली कैबिनेट बैठक में सभी पूर्व विधायकों को 300 रुपये पेंशन देने का निर्णय लिया, ताकि पूर्व विधायक सम्मानजनक जीवनयापन कर सकें। वर्तमान में पूर्व विधायकों की यह पेंशन 85 हजार रुपये मासिक से अधिक है।
पंडाल में नीचे बैठे पूर्व विधायक को धूमल नेे मंच पर दी जगह
प्रो. प्रेम कुमार धूमल जब पहली बार मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने भोरंज के कंज्याण हैलीपेड मैदान में हिमाचल दिवस पर राज्यस्तरीय कार्यक्रम करवाया। इसमें धूमल बतौर मुख्यातिथि पहुंचे थे। पुलिस के मार्च पास्ट परेड के बाद जब सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हुआ तो मंच पर बैठे मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की नजर पंडाल में नीचे बैठे पूर्व विधायक अमर सिंह चौधरी पर पड़ी। धूमल ने तुरंत प्रशासनिक अधिकारियों को आदेश दिए कि वह अमर सिंह चौधरी को मंच पर लेकर आएं और उनके बगल में बैठाया जाए। इसके बाद अमर सिंह धूमल के साथ मंच पर बैठे।