पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने प्रदेश सरकार पर कांगड़ा जिले के लोगों को केंद्रीय विश्वविद्यालय के नाम पर उलझाने के आरोप लगाए हैं। हमीरपुर में पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि 26 अगस्त 2014 को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से हिमाचल के प्रधान सचिव को पत्र भेजा गया था।
इसमें हिप्र केंद्रीय विवि के लिए देहरा में 81 हेक्टेयर भूमि का अनुमोदन किया गया है, जबकि धर्मशाला में प्रस्तावित कैंपस के लिए फाइल को दोबारा नए सिरे जमा करवाने की बात कही गई है। बावजूद इसके सरकार जिले की जनता को सीयू के नाम पर गुमराह कर रही है। पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में दो मंत्री आपस में झगड़ते हुए एक-दूसरे विभाग पर भ्रष्टाचार और पैसों के लेन- देन के आरोप लगाते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार की जांच करवाने की बजाय दोनों को शांत करवा देते हैं।
एचआरटीसी में कंडक्टर भर्ती में गोलमाल की आशंका को लेकर प्रदेश सरकार के 20 सीपीएस, मंत्री और विधायक एकजुट होकर विरोध पत्र पर हस्ताक्षर करते हैं। परिवहन मंत्री अब प्रदेश के मंत्री, विधायकों और सीपीएस को बेनकाब करने की चेतावनी देते हुए कहते हैं कि अगर किसी ने कुछ भी बोला तो वह वन रक्षकों की भर्ती और पटवारी की भर्तियों में हुई धांधली को बेनकाब करेंगे।
हमीरपुर में सर्किट हाउस को पर्यटन विभाग के सुपुर्द करने के विरोध में धूमल ने कहा कि यह एक गलत फैसला है। धूमल ने कहा कि प्रधानमंत्री से आग्रह किया जाएगा कि वह बिलासपुर से ही बटन दबाकर नादौन में प्रस्तावित धौलासिद्ध परियोजना का शिलान्यास करें।