184 उद्योग ऐसे हैं, जहां 70 फीसदी हिमाचलियों को रोजगार नहीं दिया गया है। भाजपा विधायक रमेश धवाला ने भी अनुपूरक प्रश्न में कहा कि उद्योगों में हिमाचल के युवाओं का शोषण किया जा रहा है।
आईटीआई से प्रशिक्षित युवाओं को उद्योगों में एक साल के लिए रखा जाता है, उसके बाद उन्हें निकाल दिया जाता है। उद्योगों में काम कर रही महिलाओं की कोई सुरक्षा नहीं है। तनख्वाह भी बैंक खाते के बजाए नकद दी जा रही है।
उद्योग मंत्री ने कहा कि कोशिश की जाएगी कि आईटीआई से प्रशिक्षित इन युवाओं को कंपनी में ही रोजगार दिया जा सके। विधायक परमजीत पम्मी ने विधानसभा में कहा कि उद्योगपति बाहरी राज्यों के बसों की सेवाएं ले रहे हैं।
बीबीएन में 56 बसें हिमाचल, जबकि 270 बसें दूसरे राज्यों की हैं। हिमाचल में आने वाली इन बाहरी राज्यों की बसों से 100 रुपये टैक्स लिया जाता है, जबकि अगर हिमाचल की बसें बाहर जाएं तो उनसे 3500 रुपये टैक्स वसूला किया जाता है। मंत्री ने आश्वस्त किया कि उद्योगों में हिमाचल की ही बसें सेवाएं देगी।
उद्योग मंत्री ने कहा कि रिकॉर्ड के मुताबिक बीबीएन के उद्योगों में 83,067 कर्मी रखे गए हैं, जिनमें 60,018 हिमाचली व 23,049 गैर हिमाचली हैं। इसमें हिमाचली युवाओं का प्रतिशत 72.25 बनती है।
जिला ऊना में स्थापित उद्योगों में 27,217 कर्मी रखे गए हैं, जिनमें से 21,229 हिमाचली व 5,988 गैर हिमाचली हैं। इसकी 78 प्रतिशत बनती है। कुल मिलाकर युवाओं को रोजगार देने की प्रतिशतता 70 से अधिक है।