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प्रदेश सरकार और पुलिस के लिए गले की फांस बना फॉरेस्ट गार्ड केस

Sat, 22 Jul 2017 08:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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गुड़िया हत्याकांड के बाद अब सरकार और पुलिस के लिए मंडी के फॉरेस्ट गार्ड होशियार सिंह की मौत गले की फांस बनती जा रही है। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सभी पक्षकारों को कोर्ट मित्र द्वारा उठाए सवालों का जवाब एक हफ्ते में दाखिल करने को कहा है। होशियार सिंह की मौत मामले में हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त कोर्ट मित्र ने एसआईटी तथा पुलिस जांच पर कई गंभीर सवाल उठाए।
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हाईकोर्ट में पेश सुझावों में कोर्ट मित्र ने कहा कि होशियार सिंह द्वारा कथित तौर पर खाया गया जहर कहां से आया, किसने बेचा तथा किसने खरीदा यह जांच के विषय में नहीं जोड़ा गया। जांच में पाया गया कि होशियार सिंह ने 5 जून को सुबह करीब पौने 9 बजे एक

टीजीटी मास्टर के घर दाल चाव, सलाद तथा आलू-मटर खाए थे, जबकि 10 तारीख को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी होशियार सिंह के पेट में यही पदार्थ पाए गए। डॉक्टरों के ओपिनियन के अनुसार पेट में खाना 4 से 6 घंटों में पच जाता है। अगर जहर खाया हो तो यह प्रक्रिया कुछ और देरी से पूरी होती है।
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हाईकोर्ट ने कहा- कोर्ट मित्र के सवाल गंभीर

हिमाचल हाईकोर्ट
कोर्ट मित्र के अनुसार होशियार सिंह की मौत के समय की पुख्ता जानकारी जरूरी है, क्योंकि इससे मौत की असल वजह जानने में बहुत हद तक मदद मिलेगी। 5 से 9 जून के बीच घटनास्थल पर बारिश हुई या नहीं, इस बारे में भी जांच नहीं की गई। इसका सीधा संबंध उल्टियों के धुलने से हो सकता है।

वन माफिया पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, न ही कोई बड़ी गिरफ्तारी ेहुई, जिससे मौत की वजह का पता चले। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने सभी पक्षकारों को एक सप्ताह में उठाए सवालों व सुझावों पर रिपोर्ट दायर करने के आदेश दिए।

मामले पर सुनवाई 2 अगस्त को होगी। इससे पहले सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र ने मांग की थी कि होशियार सिंह की मौत की जांच पर निगरानी स्वयं हाईकोर्ट रखे। 

सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि था, वह मामले की निष्पक्ष जांच कर रही है। सरकार ने कहा था कि यदि जांच पर सवालिया निशान उठाए जाते हैं तो सीबीआई सहित किसी भी अन्य एजेंसी से मामले की जांच करवाने पर कोई एतराज नहीं होगा।
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