भट्ठाकुफर में फोरलेन के निर्माण से वन भूमि को पहुंचा है नुकसान, चार मंजिला मकान भी हुआ था ध्वस्त अधिगृहीत भूमि से 120 मीटर बाहर तक कर दिया है निर्माण अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। कालका-शिमला फोरलेन के ढली-कैथलीघाट हिस्से के निर्माण कार्य के दौरान ढहे भट्ठाकुफर में चार मंजिला मकान और वन भूमि को हुए नुकसान के मामले की जांच जल्द शुरू होगी। वन विभाग ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
भट्ठाकुफर में इसी साल 30 जून को एक मकान गिर गया था। इसका कारण फोरलेन के लिए की जा रही खोदाई को बताया गया है। इसके अलावा आरोप है कि फोरलेन के लिए कुछ जमीन वन विभाग की भी खोद दी है।
एक सप्ताह के भीतर वन विभाग निर्माण के कारण वन भूमि और निजी भूमि का आंकलन करने के साथ ही इससे वन क्षेत्र को हुए नुकसान का पता लगाएगा। इसके बाद वन विभाग पहले से थाना ढली में फोरलेन कंपनी के खिलाफ दर्ज शिकायत को पुख्ता करने के लिए नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर पुलिस विभाग को सौंपेगा। जिला प्रशासन के राजस्व विभाग ने इस भूमि की डिमार्केशन कर अपनी रिपोर्ट में फोरलेन का निर्माण के लिए अधीगृहीत की गई भूमि से 120 मीटर बाहर निर्माण किए जाने का खुलासा किया था।
वन विभाग को राजस्व विभाग की ओर से भेजी रिपोर्ट मिल चुकी है। अब वन विभाग भट्ठाकुफर में भूस्खलन और भवन निर्माण वाले स्थल पर हुए नुकसान का आकलन करने के लिए जांच करवाएगा। इसमें घटना के कारणों, वन भूमि के कुल क्षेत्र को हुए नुकसान का पूरा आकलन किया जाएगा। घटना के तुरंत बाद वन विभाग द्वारा की गई जांच में सामने आया था कि भूस्खलन के कारण क्षेत्र की वन भूमि में लगे अलग-अलग प्रजाति के पेड़ों को नुकसान हुआ था। वन विभाग की जांच टीम इस घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जमीनी स्तर पर पड़ताल कर अपनी जांच रिपोर्ट और नुकसान का आकलन करेगा। इसे वन विभाग के आलाधिकारियों के साथ ही थाना पुलिस और उपायुक्त शिमला को सौंपा जाएगा।
विभाग अपने स्तर पर करवाएगा जांच
वन मंडल अधिकारी शिमला ग्रामीण अनिकेत वानवे ने माना कि जिला प्रशासन के आदेशों पर राजस्व विभाग की रिपोर्ट विभाग को प्राप्त हो चुकी है। अब विभाग अपने स्तर पर निर्माण स्थल पर हुए भूस्खलन से वन भूमि के प्रभावित क्षेत्रों और इससे वन संपदा को हुए नुकसान तथा इसके कारणों का पता लगाने के लिए जांच करवा रहा है। इसके पूरा होने के बाद रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।