तरुण कपूर ने बताया कि अभी तक एक बार में एक बंदर पकड़कर नसबंदी की जाती थी। जिस झुंड से बंदर पकड़ा जाता था, वह सतर्क हो जाता था और पलायन करने के साथ आक्रामक हो जाता था। ऐसे में बंदरों को पकड़ने में मुश्किलें आ रही थीं।
अब एक बार में पूरे झुंड को पकड़कर उसके पात्र नर और मादाओं को नसबंदी के बाद छोड़ दिया जाएगा। साल 2015 में हुई गणना में बंदरों की आबादी करीब दो लाख दस हजार थी।
अब तीन साल बाद फिर से बंदरों की गणना कराने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में 1.07 लाख बंदरों की नसबंदी की जा चुकी है। इस साल भी बीस हजार बंदरों की नसबंदी का लक्ष्य रखा गया है।