Forest Minister Govind Singh Thakur
प्रदेश सरकार की पर्यटन विकास योजना में वन विभाग भी हाथ बंटाएगा। महकमे ने इको टूरिज्म के लिए स्थान चुनकर सैलानियों को एक दिन के लिए मुफ्त में स्थानीय व्यंजन परोसने की योजना बनाई है। वन विभाग प्रदेश के कई स्थानों पर ऐसी सुविधा देने जा रहा है, जहां पर पर्यावरण से छेड़छाड़ किए बिना सैलानियों की आवभगत होगी।
हालांकि वन विभाग की ओर से पहले भी कई जिलों में इको टूरिज्म के क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है। इनमें चंबा जिले में प्रमुखता से कार्य जारी है। लेकिन अब इस मुहिम को वन विभाग समूचे प्रदेश में लागू करने की योजना बना रहा है।
वन मंत्री गोविंद ठाकुर का कहना है कि प्रदेश में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए ऐसे स्थलों का चयन किया जाएगा, जहां पर पर्यटकों के लिए वहां से संबंधित स्थानीय व्यंजनों को पर्यटकों के लिए एक दिन निशुल्क परोसने की व्यवस्था की जा सके। उन्होंने कहा कि पर्यटकों को स्थानीय भोज और पारंपरिक व्यंजनों से पर्यटन विकास को पंख लगेंगे। इससे स्थानीय रोजगार और सैलानियों की संख्या बढ़ेगी। विभाग बाकायदा इस योजना पर प्लान तैयार करने में लगा है।
पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं
हिमाचल जैसे धार्मिक प्रदेश में पर्यटन उद्यम के विकसित होने की अपार संभावनाएं है। हालांकि पर्यटन नगरी कुल्लू-मनाली, शिमला आदि इस श्रेणी में अग्रणी हैं, लेकिन अभी भी कई ऐसे इलाके हैं जिन्हें पर्यटन मानचित्र पर नहीं लाया जा सका है। इस क्रम में वन विभाग की इस योजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।