विदेशी सेब पौधों के मोह में कहीं हिमाचल की मौजूदा बागवानी ही चौपट न हो जाए। इससे आठ लाख परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है। ये सवाल इटली से आयातित पौधों में वायरस मिलने के बाद खड़ा हुआ है। बागवानों की आशंका यह है कि अगर कॉडलिंग मॉथ, फायर ब्लाइट जैसे कीट और रोग हिमाचल के बगीचों में इन विदेशी पौधों केे साथ पहुंच गए तो प्रदेश का बागवानी क्षेत्र तबाह हो सकता है।
विदेशी पौधों के साथ वायरस आने से प्रदेश की बागवानी विकास परियोजना पर ही बागवानों ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। हिमाचल में 3000 करोड़ के सालाना बागवानी कारोबार पर विदेशी पौधे मंगवाने की सरकारी मुहिम भारी पड़ सकती है। बागवानी विकास परियोजना में इस बार मंगवाए सेब के पौधों में जिस तरह से वायरस पाया गया है, उससे बागवानों को बगीचे बर्बाद होने की आशंका है। राज्य में कॉडलिंग मॉथ और फायर ब्लाइट जैसे कीट या रोग अभी नहीं पहुंचे हैं।
अगर पहुंच जाएं तो सेब के बगीचे रातोंरात बर्बाद हो सकते हैं। बागवानी विभाग इस बारे में सफाई दे रहा है कि जो पौधे विदेशों से मंगवाए गए हैं, उनमें कुछ पौधों में वायरस है और ये वायरस हिमाचल में पहले से ही है। ऐसे में सवाल ये है कि विदेशों से सामान्य वायरस को आने से नहीं रोका जा सका है तो खतरनाक वायरस, कीटों और रोगों ने अगर यहां प्रवेश कर लिया तो बड़ी तबाही होगी।
ऐसे खतरनाक कीटों, रोगों और वायरस से निपटने की हिमाचल में दवाएं तक दर्ज नहीं हैं। बागवानी विश्वविद्यालय नौणी और एनएचआईवी फरीदाबाद की रिपोर्ट में विदेशी पौधे वायरसयुक्त पाए गए हैं। इससे 1169 .15 करोड़ की इस पूरी बागवानी विकास परियोजना पर सवाल खडे़ हैं।
बागवानों को ये पौधे क्लस्टरों में बांटे जा रहे हैं, जबकि उनसे इन्हें रोपने के एफिडेविट नहीं लिए जा रहे हैं। आशंका ये भी है कि प्रदेश के कुछ प्रभावशाली लोग विदेशों से आ रहे सही पौधों को हथियाकर अपनी नर्सरी तैयार कर अपना व्यवसाय चमका सकते हैं। ये पौधे ऐसे क्षेत्रों में भी बांटे जा रहे हैं, जहां पीने को पानी नहीं है। ऐसे में पानी से बढ़ने वाले ये पौधे सूख भी सकते हैं।
मामले में गंभीरता बरतें सरकार और विश्वविद्यालय
जिला शिकायत निवारण समिति शिमला के सदस्य और इंजीनियर बागवान आरएल जस्टा ने इस संबंध में प्रधान सचिव बागवानी और और नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र लिखकर इस बारे में गंभीरता बरतने को कहा है। उन्होंने कहा कि ये विदेशी पौधे बागवानों का भविष्य अंधकार में डाल सकते हैं। वायरसमुक्त पौधों को विदेशों से मंगवाया जाना चाहिए था।
संक्रमित पौधे नहीं बेचेगा विभाग
राज्य बागवानी विभाग के निदेशक डा. एचएस बवेजा ने कहा है कि संक्रमित पौधों को बिल्कुल भी नहीं बेचा जाएगा। उन्होंने कहा कि बागवानों को वायरस फ्री पौधे ही दिए जाएंगे। बागवानों को इन पौधों से डरने की जरूरत नहीं है।