लोक गायक वर्षा कटोच ने जिला कांगड़ा सहित हिमाचल के लोक गीतों को नई पहचान दिलाई थी। ऑडियो कैसेट के दौर में हर घर में वर्षा कटोच की आवाज सुनाई देती थी। वर्षा हिमाचल की पहली ऐसी गायक थीं, जिन्होंने टी-सीरीज कंपनी के साथ गाना रिकार्ड किया था। उन्होंने अपना लिखा कोई भी गीत नहीं गाया, लेकिन उन गीतों को पहचान दिलाई, जिन पर धीरे-धीरे समय की धूल जम रही थी। वर्षा कटोच ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब नौवीं कक्षा में पढ़ती थीं तो उन्हें स्कूल में गाना गाने के लिए कहा जाता था। उनकी गायकी का यह दौर कॉलेज में भी जारी रहा। उन्होंने वर्ष 1993 में अपनी पहली ऑडियो कैसेट ‘धोवण’ निकाली थी। इसमें करीब छह गीत थे। उनकी पहली ही कैसेट हाथोंहाथ बिकी थी। इसके बाद उनकी करीब 40 से 50 ऑडियो कैसेटें मार्केट में आईं।
इनके माध्यम से उन्होंने प्रदेश में लुप्त हो रहे गीतों को उन्होंने अपनी आवाज दी। उन्होंने कई गायकों को भी अपने साथ गीत गाने का मौका दिया। वर्षा कटोच के गाए गीतों पर आज कई गायक वीडियो बना रहे हैं। वर्षा कटोच के बहुचर्चित गीतों में धोवण, राम सिंह, शामो नार, रुहला दी कूहल व विदाई गीतों के अलावा ऐसे गीत शामिल हैं, जिन्हें शादी-विवाह सहित अन्य समारोहों के दौरान महिलाएं गाती थीं और समय के साथ-साथ यह गीत विलुप्त हो रहे थे। वर्षा कटोच ने 1993 से लेकर 2009 तक 40 से 50 के करीब कैसेटों में आवाज दी है। उन्होंने वर्ष 2009 में ‘हुस्न पहाड़ां दा’ अपनी अंतिम कैसेट निकाली थीं। इसके बाद उन्होंने कोई भी कैसेट नहीं निकाली। उनकी हर कैसेट में करीब छह गीत होते थे, जिन्हें लोग आज भी पसंद करते हैं। मौजूदा समय में वर्षा कटोच आकाशवाणी धर्मशाला के साथ जुड़ी हुई हैं।