आबकारी एवं कराधान विभाग के सहायक आयुक्त ने माजरा थाने में लिखित शिकायत दर्ज करवाई है। हिमाचल में हजारों करोड़ रुपये के गबन का यह पहला मामला है। टैक्स चोरी की भनक लगने के बाद आबकारी विभाग की इक्नॉमिक इंटेलिजेंस यूनिट ने मामले की जांच की।
जांच में टैक्स रिटर्न और वेट-26ए में मिस मैचिंग पाई गई। इसके बाद टैक्स वसूली की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी। हालांकि, हिमाचल सीआईडी भी कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कर चुकी है। अब पुलिस में मामला पहुंचने से यह केस ईडी को ट्रांसफर करने में आसानी होगी।
दरअसल, ईडी तब तक मामला अपने हाथ में नहीं ले सकती, जब तक थाने में अपराधिक मामला दर्ज न हो। लिहाजा, आबकारी एंव कराधान विभाग के सहायक आयुक्त जीडी ठाकुर, ईटीओ पांवटा विनय कुमार, ईटीओ कालाअंब प्रेम कायथ, ईटीओ अश्वनी शर्मा ने कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है।
विभाग की ओर से लगभग14 पन्नों की रिपोर्ट पुलिस को सौंपी गई है। जिसमें सरकार व आबकारी विभाग को ही करीब 2175.51 करोड़ के टैक्स का चूना कंपनी ने लगाया है। बैंकों को लगभग 2300 करोड़ व आयकर विभाग को भी लगभग 780 करोड़ की देनदारियां कंपनी ने देनी हैं। बिजली बोर्ड समेत विभिन्न मदों को जोड़ कर यह राशि लगभग 5000 करोड़ बन रही है।
बताया जा रहा है कि इस घोटाले पर ठियोग के विधायक राकेश सिंघा ने प्रदेश सरकार से जवाब मांगा था। विधायक को जवाब देने से पहले ही आबकारी एवं कराधान विभाग ने माजरा थाने में मामला दर्ज करवा लिया।
डीएसपी पांवटा प्रमोद चौहान ने कहा कि आबकारी एंव कराधान विभाग के अधिकारियों की शिकायत पर आईपीसी की धारा-420, 467, 468, 470, 471 व 34 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। माजरा पुलिस थाना प्रभारी सेवा सिंह की टीम इस मामले की जांच करेगी।