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खुलासा! ये पांच बड़ी आपदाएं आईं तो तबाह हो सकता है हिमाचल

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हिमाचल को पांच बड़ी आपदाएं तबाह कर सकती हैं। इनसे निपटने के लिए तैयार रहने की जरूरत है। यह खुलासा राज्य लोक निर्माण विभाग ने अपने आपदा प्रबंधन प्लान 2015 में किया है। इस प्लान में चौंकाने वाली बात ये सामने लाई गई है कि प्रदेश में भूकंप की हाई रिस्क जोन में 98 फीसदी जनसंख्या रह रही है। केवल 2 प्रतिशत जनसंख्या ही कम जोखिम वाले क्षेत्र में रहती है।
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राज्य में आपदा के अन्य बड़े कारण बाढ़, बादल फटना, भूस्खलन और दुर्घटनाएं हैं। इस प्लान को विभाग ने राज्य सरकार को सौंप दिया है। इसी प्लान में भवनों, सड़कों, पुलों और अन्य आधारभूत ढांचों पर आ रही आपदाओं से निपटने की नीति तैयार की गई है। इस प्लान के मुताबिक हिमाचल में लोक निर्माण विभाग की इन संपत्तियों को सबसे ज्यादा खतरा भूकंप से है।

भूकंप के वेरी हाई रिस्क जोन में रह रही है 60 फीसदी

यह खतरा वेरी हाई और मॉडरेट दोनों श्रेणियों में ही ज्यादा रहता है। भूकंप की वेरी हाई रिस्क जोन में 60 फीसदी और हाई रिस्क जोन में 38 फीसदी जनसंख्या रहती है। केवल 2 प्रतिशत जनसंख्या ही ऐसी है, जो कम जोखिम वाले क्षेत्र में रहती है। चार अन्य आपदाओं का भूकंप के बाद सर्वाधिक खतरा रहता है।

ये बाढ़, बादल फटना, भूस्खलन और दुर्घटनाएं हैं। छठी आपदा हिमखंडों का खिसकना भी है, मगर इसका लो रिस्क रहता है। विभाग का मानना है कि जिन क्षेत्रों में इन छह तरह की आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील हैं, वहीं इन पर फोकस करने की जरूरत है। इनके अलावा सूखा और जंगल की आग जैसी आपदाएं भी यहां घटित होती हैं, मगर इनका क्षेत्र सीमित रहता है।
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जानिए ‌कौन से जिले में किस आपदा का खतरा

कांगड़ा में भूकंप, चंबा में भूकंप, भूस्खलन, हमीरपुर, बिलासपुर, सिरमौर में वनों की आग, मंडी में भूकंप, वनों की आग, कुल्लू में भूकंप, भूस्खलन, बादल फटना, किन्नौर में बादल फटना, हिमखंड खिसकना, लाहौल स्पीति में हिमखंड खिसकना और शिमला में भूकंप से ही सर्वाधिक खतरा है। ऊना में किसी भी आपदा का वेरी हाई रिस्क नहीं है, जबकि अन्य जिलों में इन बताई गई आपदाओं का है।

ऊना में केवल भूकंप, बाढ़ और सूखे से ही आपदा का खतरा है। लोक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव नरेंद्र चौहान ने बताया कि राजस्व विभाग की ओर से कहा गया था कि हर महकमे का एक आपदा प्रबंधन प्लान होना चाहिए। इसे लोक निर्माण विभाग ने बना लिया है। अब इसके हिसाब से ही आपदा प्रबंधन पर काम होगा।
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