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कैसे गई आंखों की रोशनी, आईजीएमसी की टीम करेगी जांच

Fri, 23 Dec 2016 10:57 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, तपोवन (कांगड़ा)
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टांडा मेडिकल कॉलेज में 14 दिसंबर को हुए 5 मरीजों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद आंखों की रोशनी न लौटने के मामले में सरकार ने कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ने कहा कि ऑपरेशन के दौरान प्रयोग की गई दवाई अगर संक्रमित पाई गई तो दवा निर्माता कंपनी पर कार्रवाई होगी।
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दवाई के सैंपल जांच को लेबोरेटरी भेजे हैैं। उन्होंने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। मरीजों के निशुल्क इलाज करवाने का आश्वासन दिया। कहा कि मामले की जांच को आईजीएमसी के नेत्र रोग विभाग के एचओडी डॉ. एमएल पांडे के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। कमेटी शुक्रवार को टांडा मेडिकल कॉलेज पहुंचेगी।

कमेटी एक हफ्ते में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। बताया कि 14 दिसंबर को डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज में छह ऑपरेशन हुए थे। इनमें से पांच मोतियाबिंद और एक इंजरी का किया गया था।
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इनमें से पांच रोगियों को ऑपरेशन के बाद घर भेज दिया था। एक मरीज टीएमसी में भर्ती था। डॉक्टर ने रोगी की आंखों की जांच की तो पाया कि दवाई से संक्रमण हुआ है। अन्य रोगियों को भी घर से टांडा बुला लिया।
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मरीजों की आंखों में डाली गई दवाई मार्केट में बैन

बाद में टांडा के डॉक्टरों ने रोटरी आई अस्पताल मारंडा के डॉक्टरों से बातचीत की। इसके बाद दो मरीजों को रोटरी आई अस्पताल में भर्ती करवाया गया। दो रोगियों को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया। अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि इन रोगियों की आंखों की रोशनी आएगी या नहीं।

मरीजों की आंखों में जो दवाई डाली गई, वह बाजार के केमिस्ट से लाई गई थी। फिलहाल, मार्केट में दवाई को बैन कर दिया गया है। भाजपा विधायक रविंद्र रवि ने सदन में आरोप लगाया कि सरकार को मामले की जानकारी ही नहीं थी। यह मामला मीडिया के माध्यम से उठाया गया।

इस मामले से साबित हुआ है कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति सही नहीं है। मरीजों की आंखों में डाली गई दवाई को बाहर बाजार से एक केमिस्ट से मंगवाया गया था। सरकार मामले को गंभीरता से ले। कहा कि दवाई को बैन कर दिया गया है या नहीं, क्योंकि ऐसे मामले और भी सामने आ सकते हैं।
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