टांडा मेडिकल कॉलेज में 14 दिसंबर को हुए 5 मरीजों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद आंखों की रोशनी न लौटने के मामले में सरकार ने कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ने कहा कि ऑपरेशन के दौरान प्रयोग की गई दवाई अगर संक्रमित पाई गई तो दवा निर्माता कंपनी पर कार्रवाई होगी।
दवाई के सैंपल जांच को लेबोरेटरी भेजे हैैं। उन्होंने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। मरीजों के निशुल्क इलाज करवाने का आश्वासन दिया। कहा कि मामले की जांच को आईजीएमसी के नेत्र रोग विभाग के एचओडी डॉ. एमएल पांडे के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। कमेटी शुक्रवार को टांडा मेडिकल कॉलेज पहुंचेगी।
कमेटी एक हफ्ते में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। बताया कि 14 दिसंबर को डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज में छह ऑपरेशन हुए थे। इनमें से पांच मोतियाबिंद और एक इंजरी का किया गया था।
इनमें से पांच रोगियों को ऑपरेशन के बाद घर भेज दिया था। एक मरीज टीएमसी में भर्ती था। डॉक्टर ने रोगी की आंखों की जांच की तो पाया कि दवाई से संक्रमण हुआ है। अन्य रोगियों को भी घर से टांडा बुला लिया।