बारिश से शिमला और सोलन के कई इलाकों में टमाटर की फसल प्रभावित, किसानों को सता रही घाटे की चिंता
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किसान बोले, लागत निकालना भी हुआ मुश्किल संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। बारिश ने टमाटर उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पहले कम दामों ने किसानों को परेशान किया, अब काला दाग बीमारी ने टमाटर की फसल पर कहर बरपा दिया है। कई क्षेत्रों में आधे से अधिक फसल खराब हो चुकी है, जिससे किसानों के लिए उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
सोलन और शिमला जिले में टमाटर की फसल को इससे नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि रोग नियंत्रित नहीं हुआ तो फसल की लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है। लगातार बारिश के कारण पौधों से समय से पहले पत्तियां झड़ने लगी हैं। जिला शिमला के जुन्गा, पीरन, भड़ेच और डुब्लू सहित सोलन जिले के चायल, साधूपुल, थरौला और बांजणी समेत कई गांवों में काला दाग बीमारी का प्रकोप देखा जा रहा है। किसानों का कहना है कि लगातार बारिश से वातावरण में नमी बढ़ने के कारण बीमारी तेजी से फैल रही है। इससे फफूंदनाशक दवाओं का असर भी कम हो गया है। पहले पत्तियों पर धब्बे बने, फिर वह सूखकर झड़ गईं और अब बीमारी फलों तक पहुंच गई है। कई खेतों में पौधे समय से पहले कमजोर पड़ने लगे हैं, जिससे फसल पकने से पहले ही खराब हो रही है।पीरन निवासी किसान बाबूराम ने बताया कि इस बार टमाटर की अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन लगातार बारिश ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। पौधों से पत्तियां झड़ रही हैं और फलों पर काले दाग पड़ गए हैं। जुन्गा के किसान रामकिशन ने बताया कि काला दाग रोग के कारण टमाटर के पौधे खराब हो रहे हैं। अब केवल पके हुए ही नहीं, बल्कि छोटे हरे टमाटरों पर भी काले धब्बे पड़ने लगे हैं। उन्होंने कहा कि इस बार किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। पहले मंडियों में टमाटर के दाम कम मिले और अब बीमारी से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इससे उपज घटने के साथ उचित मूल्य मिलने की उम्मीद भी कम हो गई है।
दवाएं महंगी, मौसम भी नहीं दे रहा साथ
काला दाग बीमारी पर नियंत्रण के लिए बाजार में कई फफूंदनाशक दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन उनकी कीमत काफी अधिक है। किसान जोगिंदर शर्मा ने बताया कि लगातार बारिश के कारण बार-बार दवा का छिड़काव करना भी संभव नहीं हो पा रहा है। महंगी दवाओं से खेती की लागत और बढ़ रही है।जिले में टमाटर की खेती मुख्य रूप से बसंतपुर, धाम, जुन्गा, सुन्नी, चौपाल, ठियोग-फागू तथा कसुम्पटी के निचले क्षेत्रों में की जाती है। कृषि विभाग के विषय वस्तु विशेषज्ञ सुनील कुमार ने कहा कि विभाग को फिलहाल इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि ऐसी समस्या सामने आती है तो विभाग इसकी जांच करेगा।