अग्निकांड में बेघर हुए एक दंपति की सतर्कता ने करोड़ों की संपत्ति और कई जिंदगियों को बचा लिया। 55 वर्षीय रमा सूद अस्वस्थ और बिस्तर से उठने में असहाय थी। रात करीब ढाई बजे रमा सूद को पेट्रोल की गंध महसूस हुई। रमा सूद को रात करीब ढाई बजे पेट्रोल की गंध आई।
उसने अपने पति सुशील को इस बारे बताया और बाहर जाकर देखने को कहा, इसके कुछ ही देर बाद जब कुछ जलने की गंध आई और सीढ़ियों से किसी के भागने की आवाज आई तो सुशील करोल ने दरवाजा खोलकर देखा।
उन्होंने देखा की उनके सामने वाले खाली मकान के दरवाजे से आग की लपटें निकल रही हैं। उन्होंने इस पर शोर मचाया। रमा सूद अर्थेराइटस की मरीज लाचार होने के बावजूद बिस्तर से खड़ी होकर दोनों मकानों बीच की अंधेरी सीढ़ियों से किसी तरह पहले सड़क तक, उसके बाद लोअर बाजार में सड़क के दूसरे ओर रहने वाले वाले अपने रिश्तेदारों के घर तक पहुंची।
दोनों ने शोर मचाया और इन दोनों भवनों में रह रहे लोगों और पड़ोसियों को सतर्क किया। पति सुशील ने सबसे पहले अपने घर से सिलेंडरों को बाहर फेंकने का प्रयास किया। इसी बीच उनके बाल और कान तथा मुंह झुलस गया।
इस दंपति की हिम्मत से ही समय रहते अग्निशमन विभाग को सूचना मिली और बचाव कार्य शुरू हो पाया। ये दोनों नंगे पांव अपनी दवाओं को लिए बिना ही एक ही रात में बेघर हो गए, और रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर हो गए।
साजिश हो सकता है यह अग्निकांड- रमा ने बताया कि यह पेट्रोल की गंध और किसी के भागने के बाद ही आग लगी है, जिससे यह हादसा न होकर साजिश भी हो सकती है। उनके साथ वाले मकान के दो फ्लोर पहले ही खाली थे।
उधर, आग में जले एक मकान में रह रही बुजुर्ग महिला निर्मला सूद को भी मुश्किल से उनके बेटे राजेंद्र सूद और अन्य लोगों ने सुरक्षित बाहर निकालकर उन्हें मस्जिद तक पहुंचाया। ऐसे ही न जाने कितने लोगों की जान रमा सूद और उनके पति की सतर्कता से बच गई।