शिमला में बुजुर्ग नेक चंद शर्मा के साथ मारपीट मामले में सत्र न्यायालय ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। कोर्ट ने जांच कर 28 नवंबर तक रिपोर्ट पेश करने को कहा है। घटना के बाद पुलिस ने तुरंत प्राथमिकी दर्ज नहीं की थी।
4 जून को पीड़ित नेक चंद शर्मा के साथ हुई थी मारपीट
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में बुजुर्ग से मारपीट के मामले के साढ़े तीन महीने बाद सत्र न्यायालय ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। साथ ही न्यू शिमला थाना प्रभारी को संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने और कानून के अनुसार जांच करने के निर्देश दिए।
न्यायाधीश ज्योति भागचंदानी ने कहा कि थाना प्रभारी अन्य प्रथम दृष्टया साक्ष्यों के मद्देनजर बीएनएस के प्रासंगिक प्रावधानों को जोड़ने के लिए स्वतंत्र है। 28 नवंबर 2025 तक रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करनी होगी।
यह मामला 4 जून 2025 का है। पीड़ित नेक राम की दायर याचिका के मुताबिक सुबह साढ़े बजे किरायेदारों ने उसके साथ दुर्व्यवहार कर मारपीट की। आरोप लगे हैं कि उसे थप्पड़ मारा और फोन छीनने की कोशिश की, इसमें उसे चोटें आईं। सूचना मिलने पर पुलिस ने उसका मेडिकल किया लेकिन आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इस बाबत 16 जून को उसने पुलिस अधीक्षक शिमला से भी संपर्क किया, बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब जेएमएफसी कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया है कि पुलिस अधिकारी इस बात की जांच नहीं कर सकता कि सूचना देने वालों की ओर से दी गई जानकारी विश्वसनीय और वास्तविक है या नहीं। चिकित्सक की राय के आधार पर पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार नहीं कर सकती। आवेदक के शरीर में एक फ्रैक्चर पाया गया है।