साइबर ठगों ने वीडियो काॅल पर दिखाया फर्जी दफ्तर और कोर्ट रूम, 36 बार बैंक जाकर ट्रांसफर की रकम
सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारी साइबर ठगों के निशाने पर
फर्जी लिंक और अनजाने कॉल नहीं उठाने की दी सलाह
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सेवानिवृत्त अधिकारी से 38 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में साइबर क्राइम सेल ने प्राथमिक जांच के बाद अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। शिकायत मिलते ही साइबर एक्सपर्ट्स ने त्वरित कार्रवाई करते हुए करीब पांच लाख रुपये की राशि को होल्ड करवा दिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि ठगों द्वारा प्रयोग किए गए पांच स्तरों वाले बैंक खातों तक पहुंच बनाकर और भी रकम होल्ड करवाई जा सकती है।
जांच में सामने आया है कि ठगों ने सेवानिवृत्त अधिकारी को यह कहकर डराया कि उनके नाम से मुंबई में एक बैंक खाता है जिसमें छह करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। इसके अलावा, उन्हें क्रिप्टो करेंसी से जुड़े एक फर्जी मामले में फंसाने और गिरफ्तारी का भय दिखाया गया।
ठगों ने वीडियो कॉल के माध्यम से उन्हें सीबीआई का नकली दफ्तर और कोर्ट रूम तक दिखाया, जिससे अधिकारी डर गए और करीब 36 बार बैंक जाकर ठगों द्वारा बताए गए खातों में 38 लाख रुपये जमा करवा दिए। उन्हें ठगी का अहसास तब हुआ जब पैसे ट्रांसफर करवाने के बाद ठगों के मोबाइल नंबर बंद हो गए।
इसके बाद अधिकारी ने 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करके ठगी की जानकारी दी, जिस पर साइबर क्राइम सेल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जांच शुरू की। एसपी साइबर क्राइम का कार्यभार संभाल रहे एएसपी दिनेश शर्मा ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और पांच लाख रुपये की राशि होल्ड करवा दी गई है।
सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारी साइबर ठगों के निशाने पर
साइबर क्राइम सेल के अनुसार, सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारी साइबर ठगों के खास निशाने पर रहते हैं। इसका कारण यह है कि उनके बैंक खातों में अक्सर अच्छी-खासी राशि होती है और वे नई तकनीकों से कम परिचित होते हैं। प्रदेश में इससे पहले भी कई बुजुर्गों से ‘डिजिटल अरेस्ट’ और फर्जी लिंक के जरिए लाखों रुपये की ठगी की घटनाएं हो चुकी हैं।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की धमकी भरी कॉल या संदिग्ध संदेश मिलने पर तुरंत 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाएं।
इन सावधानियों का करें पालन
अनजाने वीडियो कॉल को नजरअंदाज करें
अनजाने नंबर से आने वाले लिंक पर क्लिक न करें।
ओटीपी को किसी से भी साझा न करें
अज्ञात स्रोतों से अटेमचमेंट डाउनलोड न करें
असुरक्षित वाईफाई नेटवर्क का प्रयोग न करें
संदिग्ध वेबसाइटों से न जुड़े
लॉगइन क्रेडेंशियल किसी से साझा न करें
फायरवॉल या एंटीवायरस को अक्षम न करें
पुराने ब्राउजर का प्रयोग न करें