16वें वित्त आयोग ने अन्य राज्यों से तुलना करते हुए हिमाचल प्रदेश के बारे में कई टिप्पणियां की हैं। आयोग के अनुसार हिमाचल प्रदेश, मिजोरम और त्रिपुरा वेतन, सब्सिडी और ब्याज भुगतान जैसे बार-बार होने वाले खर्चों को प्राथमिकता देते हुए बजट का बहुत छोटा हिस्सा पूंजीगत व्यय के रूप में खर्च कर कर रहे हैं। आयोग ने सिक्किम, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को पहाड़ी राज्यों में प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से अमीर प्रदेश माना है। आयोग के अनुसार इन राज्यों ने पिछले कुछ दशकों में उच्च विकास देखा है और प्रति व्यक्ति आय भी अपेक्षाकृत अधिक रही है। उन्हें अपने यहां स्थित औद्योगिक इकाइयों को केंद्र सरकार की तरफ से काफी टैक्स रियायतों का फायदा मिला है। हालांकि, आयोग ने इसे विरोधाभासी माना है कि हिमाचल प्रदेश का कर्ज से जीएसडीपी अनुपात समीक्षा वाली पूरी अवधि के दौरान 32 प्रतिशत से ज्यादा रहा है। आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया की ओर से हस्ताक्षरित इस रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2023-24 में अरुणाचल प्रदेश अपने कुल खर्च का 29.2 प्रतिशत कैपिटल प्रोजेक्ट्स के लिए आवंटित करके सबसे आगे रहा। ओडिशा, गुजरात, झारखंड, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में से हर एक ने अपने खर्च का 20 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा कैपिटल मदों पर खर्च किया। दूसरी तरफ, पंजाब, आंध्र प्रदेश और राजस्थान ने खर्च का 10 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा कैपिटल मदों पर खर्च नहीं किया। पूर्वोत्तर पहाड़ी राज्यों में भी इसी तरह का अंतर देखा जा सकता है।