नगर निगम में लागू होगी ई-ऑफिस व्यवस्था, हर शाखा का काम ई-ऑफिस से जोड़ने की अब है तैयारी
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दो साल पहले हो चुका है ट्रायल, फाइल निपटाने की समय सीमा होगी तय अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के नगर निगम कार्यालय में जनता से जुड़ी फाइलें अब बाबुओं की मेज पर महीनों तक धूल नहीं फांकेंगी। एक क्लिक से फाइलें शाखाओं से अधिकारियों तक पहुंचेंगी। इसके लिए नगर निगम ई-ऑफिस व्यवस्था लागू करने जा रहा है। इससे कामकाज में तेजी आएगी और लोगों को भी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
दो साल पहले भी नगर निगम ने इस व्यवस्था का ट्रायल किया था, उस समय आयुक्त कार्यालय इस व्यवस्था से नहीं जुड़ा था। इसके चलते कुछ ही दिनों बाद यह व्यवस्था ठप हो गई थी। अब नए आयुक्त सचिन कंवल ने इसे लागू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। आयुक्त कार्यालय को भी जल्द इस व्यवस्था से जोड़ने के लिए कहा है। इसके तहत नगर निगम सभी शाखाओं में प्रमुख पदों पर कार्यरत कर्मचारियों की ई-ऑफिस आईडी तैयार करेगा। सभी अधिकारियों की भी अलग-अलग आईडी बनाई जाएगी। इसमें जिन अधिकारियों की आईडी पहले से बनी हुई है, उन्हें दोबारा सक्रिय किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत शाखाओं में आने वाली जनता और पार्षदों से संबंधित फाइलें ऑनलाइन ही एक विभाग से दूसरे विभाग भेजी जाएंगी। किसी विभाग या अधिकारी के पास फाइल कितने समय तक रह सकती है, इसके लिए भी समय सीमा तय की जाएगी। निर्धारित समय से अधिक देर तक फाइलें रोकने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्ती बरती जाएगी।
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डायरी से लेकर मंजूरी तक का काम होगा ऑनलाइन
डायरी शाखा में आने वाले आवेदनों को स्कैन करने के बाद संबंधित विभागाध्यक्षों तक ऑनलाइन भेजा जाएगा। अधिकारी इनका परीक्षण करेंगे और डिजिटल हस्ताक्षर कर मंजूरी देंगे। इससे नगर निगम में फाइल तैयार करने में होने वाले कागज के खर्च में कमी आएगी। साथ ही फाइलों के गुम होने या दब जाने जैसी समस्याओं से भी राहत मिलेगी। नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने बताया कि जल्द ही ई-ऑफिस व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके लिए आवश्यक तैयारियां शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं।
इनसेट दो साल बाद मिली फाइल
ई-ऑफिस व्यवस्था का एक बड़ा लाभ यह होगा कि हर फाइल और प्रस्ताव का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। इससे फाइलों के गायब होने जैसी शिकायतों पर भी रोक लगेगी। नगर निगम में दो साल पहले मंजूर हुई एक फाइल अब जाकर मिली है। यह फाइल दो वर्षों तक अन्य फाइलों के ढेर में दबी रही जिसके कारण उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।