हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी है कि सरोगेसी से मां बनने वाली महिला कर्मचारी भी मातृत्व अवकाश पाने की हकदार है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने सुषमा देवी की ओर से दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि मातृत्व अवकाश का मतलब महिलाओं को सामाजिक न्याय सुनिश्चित करवाना है। मातृत्व और बचपन दोनों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। मातृत्व अवकाश प्रदान करते समय न केवल मां और बच्चे के स्वास्थ्य के मुद्दों पर विचार किया जाता है, बल्कि दोनों के बीच स्नेह का बंधन बनाने के लिए छुट्टी दी जाती है। सरोगेसी के माध्यम से बनी मां और एक प्राकृतिक मां में भेद करने से नारीत्व का अपमान होगा।