40 साल से हक की लड़ाई लड़ रहे प्रदेश के पूर्व सैनिक वन रैंक वन पेंशन की मांग पूरी होने पर खुश जरूर हैं मगर पूरी तरह से संतुष्ट नहीं। इनका कहना है कि लंबे अरसे तक पूर्व सैनिकों के संघर्ष के बाद भाजपा की केंद्र सरकार ने उनकी मांग मानी है, लेकिन कई शर्तें भी थोप दी हैं। जिनपर उन्हें आपत्ति है।
केंद्र सरकार को इस पर फिर से विचार करना चाहिए। हालांकि, प्रदेश भाजपा ने हर जिला मुख्यालय में लड्डू बांट और पटाखे फोड़ खुशी का इजहार किया, वहीं कांग्रेस ने वन रैंक वन पेंशन को पूरी तरह से लागू न होने की बात कही है। उधर, प्रदेश के पूर्व सैनिकों ने धरना-प्रदर्शन बंद करने का अभी तक ऐलान नहीं किया है।
मोदी सरकार ने लगाए किंतु, परंतु : ब्रिगेडियर दिलीप सिंह
हमीरपुर। पूर्व सैनिक लीग के प्रदेशाध्यक्ष ब्रिगेडियर दिलीप सिंह ने वन रैंक वन पेंशन की मांग पूरी होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। ब्रिगेडियर दिलीप सिंह ने कहा कि जैसे तैसे केंद्र ने पूर्व सैनिकों की मांग को पूरा कर दिया है, लेकिन इसमें बहुत सारे किंतु, परंतु लगा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि कमीशन में एक मेंबर शामिल किया गया है।
जबकि पूर्व सैनिक कमीशन में पांच मेंबर्स शामिल करने की मांग कर रहे। वन रैंक वन पेंशन जुलाई 2014 से देने का ऐलान किया गया, जबकि पूर्व सैनिक जुलाई 2013 से इसकी मांग कर रहे हैं। ऐच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वालों को वन रैंक वन पेंशन सुविधा से वंचित रखना गलत है।
ब्रिगेडियर दिलीप सिंह ने कहा कि ड्यूटी के समय सैनिक के गंभीर चोटिल होने या घर पर पत्नी के बीमार होने की सूरत में नौकरी छोड़ घर आना पड़ सकता है, लेकिन उन्हें वन रैंक वन पेंशन लाभ से वंचित रखना गलत है। सिविल में वीआरएस का प्रावधान है, लेकिन मजबूरी में सेना की नौकरी छोड़ना वीआरएस नहीं, बल्कि इसे कंपनसेटरी ग्राउंड कहते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पूर्व सैनिकों को आंकड़ों में उलझा रही है।
केंद्र सरकार ने 90 फीसदी मांगें मानीं: बिलासपुर। पूर्व सैनिक कल्याण समिति के प्रदेशाध्यक्ष सूबेदार प्रकाश चंद कहते हैं कि वर्ष 1973 से पूर्व सैनिक वन रैंक वन पेंशन की मांग कर रहे थे। अब केंद्र सरकार ने यह मांग पूरी कर दी है। उनके अनुसार मेजर जनरल रैंक तक इसका फायदा होगा। उनके अनुसार हिमाचल में भी करीब सवा लाख सैनिक और उनके आश्रित इससे लाभान्वित होंगे। उनके अनुसार केंद्र सरकार ने 90 फीसदी मांगें मान ली है। अन्य मांगों पर कमेटी बनेगी। वह भी शीघ्र पूरी हो जाएंगी।
लाखों पूर्व सैनिकों को मिलेगा लाभ
पूर्व सैनिक निगम के पूर्व चेयरमैन कर्नल चेत राम चौहान ने कहा कि चार दशकों से पूर्व सैनिक अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे। उनकी यह मांग अब पूरी हो गई है। इसके लिए नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली केंद्र सरकार बधाई की पात्र है। वन रैंक वन पेंशन से देश के लाखों पूर्व सैनिकों का लाभ मिलेगा।
कल भूख हड़ताल करेगा पूर्व सैनिक संगठन: हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश पूर्व सैनिक संगठन इकाई हमीरपुर के स्कवाड्रन लीडर बृज लाल धीमान (सेवानिवृत्त) ने कहा कि वन रैंक वन पेंशन को लेकर केंद्र सरकार स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही है। इसको लेकर सरकार अलग-अलग बयान दे रही है।
इसके विरोध में संगठन 7 सितंबर को गांधी चौक हमीरपुर में सुबह साढ़े 9 बजे से भूख हड़ताल कर रही है। उन्होंने पूर्व सैनिकों और वीर नारियों से भूख हड़ताल में शामिल होने की अपील की है।
पूर्व सैनिकों, सैनिक विधवाओं के साथ भाजपा का धोखा : पटियाल
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस पूर्व सैनिक विभाग के चेयरमैन कर्नल धर्मेंद्र पटियाल ने कहा कि पिछले कई दिनों से ‘वन रैंक, वन पेंशन’ को लेकर धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों को आज केंद्र सरकार से अपना हक मिलने की उम्मीद थी, मगर भाजपा सरकार की ओर से घोषित ‘वन रैंक, वन पेंशन’ से 22 लाख वैटर्न्स एवं दो लाख सैनिक विधवाओं को वीआरएस की आड़ में धोखा मिला।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय रक्षा मंत्री मनोहर परिकर की ओर से प्रेंस कांफ्रेंस में लागू ‘वन रैंक वन पेंशन’ के अनुसार जो पूर्व सैनिक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के तहत सेवानिवृत हुए हैं, उनको वन रैंक वन पेंशन का लाभ बिलकु ल नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस शर्त से लगभग 60 प्रतिशत पूर्व सैनिक और सैनिक विधवाओं को वन रैंक वन पेंशन का कोई लाभ नहीं मिलेगा और साथ ही पांच वर्ष के बाद एक बार ही पूर्व सैनिकों को पेंशन में बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा।
प्रदेश कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग के चेयरमैन कर्नल धर्मेंद्र पटियाल ने कहा कि भाजपा सरकार की ओर से घोषित ‘वन रैंक, वन पेंशन’ का देश भर में फैले पूर्व सैनिकों ने पुरजोर विरोध कर दिया है और अंत तक वन रैंक वन पेंशन को कोशियारी कमीशन के अनुसार लागू करवाने का प्रण लिया है।
उन्होंने कहा कि भाजपा, आरएसएस ने पूर्व सैनिकों को आपस में लड़वाने और बांटने का पूर्ण प्रयास किया है, लेकिन पूर्व सैनिकों ने एकजुटता दिखाते हुए अपने संघर्ष को जारी रखा और आगे भी एकजुट होकर ‘वन रैंक, वन पेंशन’ पर अपनी लड़ाई को देशभर में और मुखर करने का ऐलान किया है।
'मुझे उम्मीद है बाकी मांगें भी पूरी करेगी सरकार'
40 वर्षों के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने पूर्व सैनिकों की मांग को स्वीकारते हुए पहला कदम उठाया है। मुझे उम्मीद है कि केंद्र सरकार जल्द ही अन्य मांगों को भी मान लेगी। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन के दायरे से बाहर रखना ठीक नहीं है। पेंशन रिवाइज के लिए पांच साल का समय बहुत लंबा है। इसे कम करने की जरूरत है। मोदी सरकार का आभार। -रिटायर्ड ब्रिगेडियर खुशहाल सिंह ठाकुर, एक्स सर्विसमैन मूवमेंट के प्रदेश अध्यक्ष एवं कारगिल हीरो
हवलदार चमेल सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने सत्ता में आने से पहले पूर्व सैनिकों से जो वायदा किया था, उसे पूरा कर दिखाया है। पूर्व सैनिक हमेशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आभारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि एक समान पद पर सेवाएं देने के बावजूद सेवानिवृत्ति के बाद पूर्व सैनिकों की पेंशन में काफी बड़ा अंतर था, जिसे केंद्र की एनडीए सरकार ने दूर कर दिया है।
लोकसभा में सबसे पहले मैंने उठाया था मामला : धूमल
पूर्व सैनिकों की लगभग 40 साल से चली आ रही ‘वन रैंक वन पेंशन’ की मांग को स्वीकार किए जाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि इतने सालों तक कांग्रेस इस मसले पर पूर्व सैनिकों के साथ छल करती रही, मगर आज भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पूर्व सैनिकों की इस मांग को मंजूर कर अपना वायदा निभाया है।
धूमल ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से इस बात के लिए अत्यधिक गर्व है कि लोकसभा सांसद रहते हुए लोकसभा में सबसे पहले इस मुद्दे को उन्होंने उठाया था। इसके साथ ही भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती, उपाध्यक्ष नरेंद्र बरागटा, महेंद्र सिंह ठाकुर, डा. राजीव सहजल, प्रो. सिकंदर कुमार, प्रदेश महामंत्री डा. राजीव बिंदल, विपिन परमार, रणधीर शर्मा, प्रवक्ता गणेश दत्त, मीडिया प्रभारी प्रवीण शर्मा आदि ने भी ‘वन रैंक वन पेंशन’ की मांग को मंजूर किए जाने के लिए एनडीए सरकार को धन्यवाद दिया है।