यानी दोनों के पुराने संबंध हैं। चयनित उम्मीदवार के पिता भी उसी विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं, जहां से इंटरव्यू के लिए विशेषज्ञ बुलाए। विशेषज्ञ कुलपति के साथ इंटरव्यू वाले दिन पहले अलग से बैठे।
इन्होंने इस उम्मीदवार के पक्ष में स्कोर कार्ड बदला। फेक लीड पेंसिल से लिखा स्कोर कार्ड इंटरव्यू बोर्ड के समक्ष रखा। अन्य उम्मीदवारों के लिए इंटरव्यू के नंबर जमा और माइनस/प्लस दो या तीन के मार्जिन पर ही थे, जबकि इस उम्मीदवार को स्कोर में बहुत ऊपर रखा।
इंटरव्यू बोर्ड में एंटोमॉलोजी विभागाध्यक्ष का होना जरूरी था, उन्हें छुट्टी पर भेजा दिया गया। इस पद को किसान विकास केंद्र ताबो जनजातीय क्षेत्र के लिए विज्ञापित किया था, मगर चयनित उम्मीदवार से नौणी विश्वविद्यालय में ही निजी काम लिया जाता रहा।
बागवानी विश्वविद्यालय नौणी के तत्कालीन कुलपति डा. एचसी शर्मा का कहना है कि एक ही क्षेत्र से होना एक संयोग है। यह सही है कि चयनित अधिकारी उनके साथ आईसीआरआईएसएटी में काम कर चुका है।
हालांकि, डा. शर्मा ने दावा किया कि भर्ती में गड़बड़ी नहीं हुई है, बेशक जांच की जाए। भर्ती बोर्ड विशेषज्ञों की नियुक्ति नियमानुसार हुई है। डा. एचसी शर्मा पिछले दिनों ही सेवानिवृत्त हुए हैं।