इस बांध पर 66 मेगावाट की क्षमता वाली छह यूनिटें स्थापित हैं, जहां से 396 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। बरसात के मौसम में पहाड़ों से निकलने वाली छोटी-बड़ी खड्डों और नदियों के पानी साथ कई पोषक तत्व बहकर पौंग बांध पहुंच जाते हैं। बरसात के बाद पौंग बांध का जलस्तर घट जाता है। स्थानीय लोग हरित क्रांति साबित हुए इस पौंग बांध के किनारे उपजाऊ जमीन पर खेतीबाड़ी कर लेते हैं।
वाइल्ड लाइफ संरक्षण विभाग की मानें तो इस अवैध खेती से किसानों को सालाना 4.72 करोड़ रुपये की आमदन हो रही है। प्रति व्यक्ति यह आमदन 78730 रुपये सलाना बताई जा रही है। विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक अकेले पौंग बांध के किनारे घास से ही 82 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है।
वन्य जीव संरक्षण विभाग के सर्वे के मुताबिक अवैध खेती से वन्य संरक्षण विभाग को नुकसान हो रहा है। वहीं दूसरी जगह मुरब्बे मिलने के चलते अब बांध के किनारे खाली जमीन पर कोई भी परिवार अपना हक नहीं जता सकता। वन्य संरक्षण विभाग शीघ्र इस पर बड़ी कार्रवाई करने जा रहा है।
-पौंग बांध के किनारे करीब 500 लोग अवैध तरीके से खेतीबाड़ी कर रहे हैं। खेती से किसानों को सालाना 4.72 करोड़ रुपये की आमदन हो रही है। अकेले पौंग बांध के किनारे घास से ही 82 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है। विभाग इस पर शीघ्र सख्त कार्रवाई अमल में लाएगा। - कृष्ण कुमार, वन जीव संरक्षण विभाग हमीरपुर के डीएफओ