उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी को परेशान करने के लिए नहीं था। यह किसानों की अहमियत समझाने के लिए था। जब यह लगा कि इससे आम जनता को परेशानी हो रही है तो छठे दिन ही इसे स्थगित करने का निर्णय ले लिया गया।
पंजाब और हिमाचल में इसे पूरी तरह से स्थगित किया गया है। बाकी जगहों पर यह अभी भी जारी है। उन्होंने कहा कि स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट को लागू करने, किसानों की संपूर्ण ऋण माफी करने और किसानों की न्यूनतम आमदनी को निर्धारित करने जैसे मुद्दों पर किसान लामबंद हुए हैं।