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यहां इस कारण खतरे में पड़ गई गूर की कुर्सी, बड़ादेव कमरूनाग की शरण में बागवान

Mon, 22 Jan 2018 10:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोहर (मंडी)
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मौसम की बेरुखी से बने सूखे जैसे हालात के बीच लोग बारिश के देवता बड़ादेव कमरूनाग की शरण में पहुंच गए हैं। बारिश का देवता माने जाने वाले देव कमरूनाग के गूरों की तो बाकायदा परीक्षा शुरू हो गई है। बारिश कराने की कसौटी पर खरा न उतरने पर तो गूर को कुर्सी से भी हाथ धोना पड़ सकता है। 
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मंडी क्षेत्र में सूखा पड़ने और बारिश न होने पर ज्योग, तांदी, लोट, धार, गलयांडी समेत अनेक गांवों के लोगों ने क्षेत्र के अधिष्ठाता देव कमरूनाग के गूरों से देवता को मनाने और बारिश करने के लिए धूप दिलाने में लग गए हैं। 
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अब लोगों के पास बची ये आस

शनिवार को देवता के वर्तमान गूर नीलमणी ने धंगयारा स्थित देवता के मूल स्थान में बारिश के लिए धूप दिया। अगर नीलमणी गूर के धूप के बाद रविवार तक बारिश नहीं होती है तो देवता के पुराने और कुछ नये गूरों से भी बारिश के लिए देव कमरूनाग को धूप दिलाया जाएगा। 

देवता का जो भी गूर देवता को मनाकर बारिश करवाने में सफल हो जाएगा, उसे कमरूनाग देव के गूर की कुर्सी मिल जाएगी। शनिवार को नीलमणी के धूप के बाद अब उनकी कुर्सी खतरे में पड़ गई है। 

महीनों से बारिश का इंतजार जारी है। अब लोगों को देव कमरूनाग से आस बची है। गत वर्ष भी देवता के सभी गूर देव कमरूनाग को मनाने में नाकाम हो गये थे। जिसके बाद देवता के गूर की कुर्सी नीलमणी को मिली थी। शनिवार से शुरू हुआ यह सिलसिला अब बारिश न होने तक जारी रहेगा।
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