वजीर राम सिंह पठानिया के वंशज पूर्व परिवहन मंत्री केवल सिंह पठानिया, विश्व हिंदू परिषद में धर्म प्रसार प्रांत अध्यक्ष उदयवीर पठानिया, राजेश्वर पठानिया आदि का कहना है कि वजीर राम सिंह ने जिस वीरता से अंग्रेजों का मुकाबला किया था, उसके डर से अंग्रेज कई दिन तक चैन से सो भी नहीं पाए थे।
ब्रिटिश हुकूमत से आजादी के लिए 1857 की सशस्त्र क्रांति से भी 10 वर्ष पहले अंग्रेजों के विरुद्ध शस्त्र उठाने वाले नूरपुर के वजीर राम सिंह पठानिया को प्रदेश सरकार अभी तक शहीद का दर्जा नहीं दे पाई है। इसके लिए विभिन्न मंचों से कई बार मांग भी उठाई जा चुकी है। इसके बावजूद पठानिया के बलिदान को समुचित सम्मान नहीं मिल पाया है।
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नूरपुर राजपूत सभा और विश्व हिंदू परिषद ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को नूरपुर में शहीद का दर्जा दिए जाने संबंधी ज्ञापन सौंपा था। इसके अलावा केंद्र के पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को भी इस संबंध में पत्राचार किया जा चुका है।
वजीर राम सिंह पठानिया के वंशज पूर्व परिवहन मंत्री केवल सिंह पठानिया, विश्व हिंदू परिषद में धर्म प्रसार प्रांत अध्यक्ष उदयवीर पठानिया, राजेश्वर पठानिया आदि का कहना है कि वजीर राम सिंह ने जिस वीरता से अंग्रेजों का मुकाबला किया था, उसके डर से अंग्रेज कई दिन तक चैन से सो भी नहीं पाए थे। मात्र कमंडल से ही उन्होंने अनेक अंग्रेजों को धराशायी कर दिया था।
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बाद में रंगून में अंग्रेजों द्वारा अमानवीय अत्याचारों के उपरांत मां भारती के चरणों में बलिदान दे दिया। उन्होंने कहा कि वजीर राम सिंह पठानिया का इतिहास हिमाचल की पुस्तकों में पढ़ाया जाए। हालांकि उनके नाम पर देहरी कॉलेज का नाम पर रखा गया है। नूरपुर का नाम भी वजीर राम सिंह के नाम पर रखने की कवायद हो रही है, लेकिन शहीद का दर्जा देने में प्रदेश की किसी भी सरकार द्वारा गंभीर प्रयास नहीं किया गया है।